पंजाब में शौर्य चक्र विजेता बलविंदर सिंह का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार, घर में घुसकर की गई थी हत्या

आतंकवादियों से लोहा लेने वाले शौर्य चक्र विजेता बलविंदर सिंह भिखीविंड के शव का पट्टी के अस्पताल से पोस्टमार्टम तो हो गया, पर परिवार ने अंतिम संस्कार करने से मना करते हुए सरकार समक्ष मांगे रख दी। इससे काफी देर तक प्रशासन पसोपेश में रहा। हालांकि बाद में एसडीएम राजेश खुल्लर ने मांगें मानने का आश्वासन दिया। इसके बाद स्वजन संस्कार के लिए राजी हो गए हैं। इसके बाद बलविंदर सिंह भिखीविंड का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया।

बलविंदर सिंह भिखीविंड के शव को परिवार वाले पट्टी अस्पताल से सीधा घर लेकर आए और कहा कि जब तक मांगे पूरी नहीं होती तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। बलविंदर सिंह की पत्नी जगदीश कौर ने कहा कि  ने देश के लिए शहादत दी है, इसलिए उनको शहीद का दर्जा देने के साथ परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी दी जाए।

पत्नी ने कहा कि पूरे परिवार की सुरक्षा को यकीनी बनाया जाए और आरोपितों को जल्द गिरफ्तार किया जाए। बलविंदर सिंह के भाई रंजीत सिंह ने कहा कि आतंकवाद का दलेरी से मुकाबला करने के वाले परिवार की सुरक्षा को लेकर पुलिस व सरकार गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि यह भी बताया जाना चाहिए कि शौर्य चक्र विजेता बलविंदर सिंह सेे सुरक्षा क्यों वापस ली गई थी।

बलविंदर सिंह की बेटी परनप्रीत कौर का कहना है कि अगर उनके परिवार के पास सुरक्षा होती तो हत्यारों की ऐसी हिम्मत कभी नहीं होती। हमने कई ईमेल, लिखित आवेदन भेजे और अधिकारियों से भी मुलाकात की, लेकिन हमें कोई सुरक्षा नहीं मिली।

वल्टोहा भी पहुंचे

खेमकरण हलके के पूर्व विधायक और शिअद नेता विरसा सिंह वल्टोहा परिवार के साथ दुःख बांंटने पहुंचे। वहीं, लोगों ने इस बात पर नाराजगी जताई की वर्तमान कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह भुल्लर खिलाफ यहां नहीं पहुंचे। इसके बाद पुलिस और सिविल प्रशासन के अधिकारियों के कहने पर विधायक भुल्लर पहुंचे।

बता दें, शौर्य चक्र विजेता कामरेड बलविंदर सिंह भिखीविंड की शुक्रवार सुबह सात बजे दो अज्ञात बाइक सवार हमलावरों ने गोलियां मारकर हत्या कर दी थी। आतंकियों की हिट लिस्ट में होने के बावजूद पुलिस ने इस साल उनकी सुरक्षा वापस ले ली थी। बलविंदर सिंह सुबह सात बजे अपने घर की निचली मंजिल में चल रहे प्राइवेट स्कूल के दफ्तर के बाहर घूम रहे थे। तभी दो बाइक सवार वहां पहुंचे। एक युवक ने पिस्तौल निकाली और बलविंदर सिंह पर गोलियां चलाना शुरू कर दी। कुल आठ राउंड फायर किए। बचाव के लिए बलविंदर दफ्तर की ओर भागे। आरोपित ने पीछे से उन पर लगातार गोलियां चलाईं। तीन गोलियां लगने से बलविंदर सिंह वहीं गिर पड़े और उनकी मौत हो गई। हमलावर स्कूल के गेट से होते हुए भाग निकले।

आतंकवाद से सताए हिंदुओं को सुरक्षा देते थे, परिवार पर 42 हमले

बलविंदर सिंह सरकारी शिक्षक थे, जबकि भाई रंजीत सिंह पंजाब रोडवेज में नौकरी करते थे। आतंकियों के खिलाफ चलाई मुहिम के कारण दोनों ने 1987 में नौकरी छोड़ दी थी। दोनों आतंकवाद से सताए हिंदूदू परिवारों सुरक्षा देते थे। इसी कारण उनके परिवार पर पंजाब में आतंकवाद के दौरान 42 बार हमले हुए। उन्होंने डटकर आतंकियों का मुकाबला किया और पुलिस की हमेशा मदद की। इसके चलते बलविंदर सिंह व उनके परिवार के तीन अन्य सदस्यों पत्नी जगदीश कौर, भाई रंजीत सिंह व भाभी बलराज कौर को 14 अप्रैल, 1993 को राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा ने शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था। इस परिवार पर कई डाक्यूमेंट्री फिल्में भी बन चुकी हैं।

कैप्टन ने बनाई एसआइटी

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने घटना की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआइटी) गठित कर दी है। उन्होंने डीजीपी दिनकर गुप्ता की घटना की जांच जल्द पूरी कर आरोपितों को पकडऩे के लिए कहा है। एसआइटी का जिम्मा फिरोजपुर रेंज के डीआइजी हरदयाल सिंह मान को दिया गया है। हरदयाल सिंह दोपहर बाद मौके पर पहुंचे और परिवार से बात की। साथ ही भरोसा दिलाया कि हमलावरों को जल्द पकड़ लिया जाएगा। सुरक्षा वापस लेने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसकी जांच एसएसपी ध्रुमन एच निंबाले को दी गई है। यह घटना आतंकी वारदात का हिस्सा है या नहीं इस पर उन्होंने कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया। उन्होंने बताया कि पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज जब्त कर ली है। इससे कुछ सुराग मिल सकता है।