
सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा के खिलाफ दायर एक याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति को अपने पुत्र और दो भाइयों को जिंदा जलाकर मारने के मामले में सुनाई गई मौत की सजा को बरकरार रखा था। इस व्यक्ति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके मौत की सजा को चुनौती दी।
जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस अशोक भूषण की अवकाशकालीन पीठ ने इस अपील पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया। अदालत ने मामले के मूल रिकॉर्ड मांगे है। दोषी व्यक्ति इरफान की तरफ से पेश वकील ने शीर्ष अदालत से मौत की सजा के अमल पर रोक लगाए जाने का आग्रह किया। इस पर पीठ ने कहा, ‘जब अपील हमारे समक्ष लंबित है, तो कोई भी इस सजा पर अमल करने नहीं जा रहा है।
’पीठ ने अपने आदेश में कहा ,‘‘ इस मामले की सूचना संबंधित जेल प्राधिकरण के पास भेजी जाएगी।’ इरफान ने हाईकोर्ट के 25 अप्रैल को दिए गए उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें बिजनौर जिले की एक निचली अदालत द्वारा उसे सुनाई गई मौत की सजा को बरकरार रखा था।