नागोर्नो-काराबाख में नहीं दिख रहे शांति के आसार, दोनों इलाकों का शांत रहना असंभव

 अर्मैनिया और अजरबैजान के बीच चल रहे युद्ध के खत्म होने के आसार नहीं दिख रहे हैं। एक बात ये भी कही जा रही है कि ये दोनों इलाके एक साथ कभी नहीं रह सकते हैं। नागोर्नो-काराबाख इलाके में कई दिनों से युद्ध जारी है। बीते शानिवार को दोनों देशों के बीच युद्ध खत्म करने पर सहमति बनी थी मगर 48 घंटे बीतने के साथ ही फिर दोनों देश एक दूसरे पर बमबारी करने लगे। ये भी कहा जाने लगा है कि ये दोनों इलाके एक साथ नहीं रह सकते हैं। इस युद्ध के दौरान अब तक 600 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

क्या है नागोर्नो-काराबाख का इतिहास 

नागोर्नो-काराबाख 4,400 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ एक बड़ा इलाका है। इस इलाके में आर्मीनियाई ईसाई और मुस्लिम तुर्क रहते हैं। ये इलाका अजरबैजान के बीच आता है। बताया जाता है कि सोवियत संघ के अस्तित्व के दौरान ही अजरबैजान के भीतर का यह एरिया एक स्वायत्त (Autonomous Area) बन गया था।  अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस इलाके को अजरबैजान के हिस्से के तौर पर ही जाना जाता है लेकिन यहां अधिकतर आबादी आर्मीनियाई रहती है। 1991 में इस इलाके के लोगों ने खुद को अजरबैजान से स्वतंत्र घोषित करते हुए आर्मेनिया का हिस्सा घोषित कर दिया। उनके इस हरकत को अजरबैजान ने सिरे से खारिज कर दिया। इसके बाद दोनों देशों के बीच कुछ समय के अंतराल पर अक्सर संघर्ष होते रहते हैं।