कोरोना काल में स्कूल बंद रहे और विद्यार्थियों को करवाई जा रही ऑनलाइन पढ़ाई…

कोरोना काल में स्कूल बंद रहे और विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई करवाई जा रही है। फीस वसूली को लेकर अभिभावक व निजी स्कूल संचालक आमने-सामने हैं। अभिभावकों के साथ-साथ अलग-अलग संगठनों ने सोशल मीडिया से लेकर सड़क पर फीस वसूलने वाले निजी स्कूल संचालकों के खिलाफ मोर्चा खोला है। इस बीच छोटे निजी स्कूलों ने सोशल मीडिया पर ही अपने स्कूलों के लेटर हेड पर लिखकर पोस्ट कर दिया कि वह फीस नहीं वसूलेंगे। छोटे स्कूलों की इस दरियादिली ने बड़े स्कूलों को आफत में डाल दिया। फीस वसूलने का विरोध करने वाले अभिभावक अब बड़े स्कूल संचालकों पर तंज कसने लगे हैं कि जब छोटे स्कूल जो कम फीस लेते हैं वह फीस छोड़ सकते हैं तो बड़े स्कूल क्यों फीस वसूली पर अड़े हैं? हिंदू सिख जागृति सेना के प्रधान प्रवीण डंग समेत कई नेताओं ने सोशल मीडिया पर बड़े स्कूलों की इस बात पर जमकर खिंचाई की।

दूर से ही दिखाया चांद

लॉकडाउन के दौरान सारा उद्योग व्यापार ठप हो गया। दो माह की बंदी के कारण उद्यमियों के समक्ष आर्थिक संकट की स्थिति पैदा हो गई। पैसे का सर्कल पूरी तरह से रुक गया। ऐसे में केंद्र सरकार ने उद्यमियों को बीस लाख करोड़ का आर्थिक पैकेज दिया। इसमें सरकार ने हर वर्ग के उद्योगों को खुश करने का प्रयास किया। पैकेज में माइक्रो स्मॉल एंड मीडियम इंडस्ट्री के लिए तीन लाख करोड़ का प्रावधान किया। इसके अलावा भी कई राहतों का एलान किया गया। इसे देखकर उद्यमी पहले तो खुश थे, फिर पूरे पैकेज के हर बिंदु को सिलसिलेवार खंगाला तो उन्हें लगा सरकार ने कुछ खास नहीं दिया। पैकेज को लेकर कुछ उद्यमी मंथन कर रहे थे कि केके सेठ ने कह दिया कि सरकार ने दूर से चांद दिखा दिया, हाथ कुछ नहीं आया, सिर्फ देखते ही रहो। ऐसे में इंडस्ट्री की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं हो सकती।

मेहनत पर फिरने लगा पानी

पुलिस कमिश्नर राकेश अग्रवाल ने लुधियाना आते ही पुराने बाजारों से अवैध कब्जों को हटाने की मुहिम चला दी। उनकी मेहनत रंग लाई और पुराने शहर से अवैध कब्जे एवं रेहड़ी, फड़ी वालों का अतिक्रमण खत्म हो गया। पुलिस ने सख्ती दिखाई और नियम तोड़ने वालों के धड़ाधड़ चालान काटे, परचे भी दर्ज किए। लोगों को शहर एवं बाजार खुले-खुले लगने लगे। इसके बाद कोरोना का अटैक हो गया। कोरोना से निपटने के लिए दो माह तक कफ्यरू लगा रहा। पुलिस कोरोना से संबंधित अन्य कामों में उलझ गई। अब अनलॉक-वन में सब कुछ खुलने लगा है। बाजार सजने लगे हैं। लेकिन साथ ही फिर से पुराने बाजार में अवैध कब्जे, रेहड़ी एवं फड़ियां भी लगने लगी हैं। कारोबारी दुकानों के आगे सामान रखने लगे हैं। रेहड़ी, फड़ी वाले भी बेखौफ हैं। आखिरकार चौड़ा बाजार के कारोबारी बीनू ने कह ही दिया कि सारी मेहनत पर पानी फिर गया है।

लिफ्ट देना पड़ गया महंगा

कोरोना के संक्रमण से आम जन को बचाने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारें नई-नई गाइडलाइंस जारी कर रही हैं। लोगों के लिए शारीरिक दूरी, मास्क एवं सैनिटाइजर इत्यादि को अनिवार्य किया गया है। लोग इसका पालन भी कर रहे हैं। प्रशासन ने शारीरिक दूरी बनाए रखने को दोपहिया वाहन पर दूसरी सवारी बैठाने पर प्रतिबंध लगा रखा है। इसका सख्ती से पालन भी कराया जा रहा है। इसके चलते दोपहिया वाहन पर लिफ्ट देने का चलन भी लगभग खत्म हो रहा है। कैलाश चौक से कारोबारी सौरभ किसी काम से घंटाघर अपने दोपहिया वाहन पर जा रहे थे। रास्ते में एक परिचित ने लिफ्ट मांगी। कारोबारी ने लिफ्ट दी और कोरोना पर उनकी चर्चा शुरू हो गई। कुछ दूर ही गए थे कि पुलिसकर्मी ने रोक लिया और दोहरी सवारी का चालान काट कर हाथ में थमा दिया। अब दोनों एक दूसरे का मुंह देख कर मुस्कुरा रहे थे।