IAS Janak Pathak Case : जिलों में पदस्थ ज्यादातर अफसर रेस्ट रूम बंद किए जाने के है खिलाफ…

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा के तत्कालीन कलेक्टर जेपी पाठक पर कलेक्ट्रेट स्थित रेस्ट रूम में दुष्कर्म का आरोप सामने आने के बाद ब्यूरोक्रेसी में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। चर्चा यह भी है कि अफसरों के कार्यालय के रेस्ट रूम बंद किए जा सकते हैं। हालांकि इस पर न तो कोई अधिकृत बयान आया है और न ही कोई आदेश हुआ है। बता दें कि राज्य के ज्यादातर कलेक्टरों के ऑफिस में एक रेस्ट रूम है।

राज्य में नए बने मंत्रालय भवन में भी अधिकांश सचिवों के कमरे में इस तरह की व्यवस्था की गई है। सामान्यतः अफसर इस कमरे का उपयोग दोपहर में भोजन करने व थकान मिटाने के लिए करते हैं। पाठक प्रकरण के बाद इन रेस्ट रूम को खत्म करने या उसमें बदलाव करने पर विचार किया जा रहा है।

यह भी बता दें कि आइएएस पाठक पर एक एनजीओ संचालिका ने कलेक्टर कार्यालय में ही दुष्कर्म का आरोप लगाया है। यही वजह है कि रेस्ट रूम इन दिनों अफसरों के बीच चर्चा में है। जिलों में पदस्थ ज्यादातर अफसर रेस्ट रूम बंद किए जाने के खिलाफ हैं।

उनका कहना है कि अल सुबह से दौरा, फिर दिनभर ऑफिस वर्क। दिन में घर जाने का मौका ही नहीं मिलता। ऐसे में रेस्ट रूम ही सहारा रहता है। रेस्ट रूम खत्म ही करना है तो मंत्रालय का किया जाना चाहिए। वहां अफसर सुबह 10-11 बजे पहुंचते हैं, दोपहर में खाना-खाने भी जाते हैं, इसके बाद शाम पांच बजते ही घर भी चल देते हैं।

इसके बावजूद मंत्रालय में हर सचिव के कार्यालय में रेस्ट रूम बना हुआ है। जिले में पदस्थ एक अफसर ने पुराने मंत्रालय की एक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि वहां एक महिला कर्मी ने दूसरी मंजिल से कूद कर खुदकुशी कर ली थी। मामला जैसे-तैसे निपटाया गया था। मंत्रालय के अफसर भी रेस्ट रूम बंद किए जाने के खिलाफ हैं। उनका कहना है कि किसी एक की गलती के कारण पूरा सिस्टम बदलना उचित नहीं कहा जा सकता।