
आग की घटना के बाद सोमवार को अनाज मंडी से अस्पताल तक गम और गुस्सा पसरा रहा। अनाज मंडी के साथ पुरानी दिल्ली के कई बाजार बंद रहे। घटनास्थल पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। बदहवास हालत में अपने प्रियजनों को तलाश रहे थे तो कहीं शवों पर बिलख रहे थे। इस बीच अलग अलग अस्पतालों में पोस्टमार्टम के बाद शवों को परिजनों को सौंपा गया। शवों को घर तक ले जाने के इंतजाम नहीं होने से भी कई परिजन गुस्से में दिखाई दिए।

अनाज मंडी से लेकर सदर बाजार के अन्य हिस्सों में व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे। स्थानीय लोग 43 मौतों से सदमे और दुख में थे। यही हालत लेडी हार्डिंग, एलएनजेपी एवं राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भी था। कोई अपने बेटे तो कोई भाई और कोई अपने पति को ढूंढ़ने आया था। पहले घायलों की सूची देखते और जब नाम नहीं मिलता तो मृतकों की सूची में नाम तलाशा जाता। फिर जब यह जान जाते कि मौत हो गई है तो फिर हर तरफ रोने की आवाजें सुनाई देतीं। अनाजमंडी निवासी पप्पू खां कहते हैं कि व्यवस्था की चूक से हादसा हुआ है। हादसे के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वह कहते हैं कि पहली बार इस इलाके में इतनी दुकाने बंद हुई हैं।
घटना पर गम, व्यवस्था पर गुस्सा
अस्पताल और घटनास्थल पर पहुंचे परिजन घटना से दुखी थे, लेकिन व्यवस्था लेकर गुस्सा भी था। हादसे में मृतक मुजफ्फरपुर बिहार निवासी बबलू का भाई हैदरअली अपने भाई के शव को लेकर गांव जाना चाहता था, लेकिन शव ले जाने की कोई व्यवस्था नहीं थी। मृतक अकबर की चाची नूरजहां गुस्से में कहती हैं कि रविवार से ही अस्पताल में बैठी हैं, लेकिन सोमवार शाम तक पोस्टमार्टम नहीं हुआ। पोस्टमार्टम के लिए भी अलग से इंतजाम नहीं किए गए। इसके चलते तीसरे दिन भी पोस्टमार्टम होंगे। लोग बार बार यही सवाल कर रहे थे कि आखिर कबतक गरीबों की जिंदगी से खेला जाएगा, बवाना अग्निकांड की घटना से क्या सबक लिया?
दो आरोपी 14 दिन की पुलिस हिरासत में
मामले में गिरफ्तार दो आरोपी रेहान और मैनेजर फुरकान को सोमवार दोपहर तीस हजारी कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने दोनों को 14 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। क्राइम ब्रांच की टीम मामले की जांच कर रही है।