
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा के बाद चीन की तरफ से बड़ा बयान सामने आया है। चीन ने फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) को लेकर भारत पर निशाना साधते हुए कहा है कि कुछ सदस्य देश अपने एजेंडा लागू कराने के लिए FATF का राजनीतिकरण कर रहे हैं। वहीं चीन के इस रुख से स्पष्ट है कि वह इतनी जल्दी पाकिस्तान का हाथ छोड़ने वाला नहीं है और उसकी अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में लगा हुआ है।

चीनी विदेश मंत्रालय के एशियाई मामलों के विभाग के उप महानिदेशक याओ वेन ने कहा कि चीन नहीं चाहता कि कोई अकेला देश FATF का राजनीतिकरण करे। लेकिन कुछ देश पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट में डालना चाहते हैं। उनके अपने राजनीतिक एजेंडे है, जिनका चीन विरोध करता है। याओ ने कहा कि चीन के चलते उनकी पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट करने की कोशिशें बेकार साबित हुईं।
याओ का कहना है कि हमने भारत और अमेरिका दोनों को स्पष्ट कर दिया है कि चीन इस मुहिम में उनके साथ नहीं है, क्योंकि यह FATF के उद्देश्यों से बाहर है। याओ के मुताबिक एफएटीएफ किसी देश को काली सूची में डालने के लिए नहीं है, बल्कि आतंक में इस्तेमाल हो रही फंडिंग के खिलाफ है। वहीं उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान प्रभावी तरीके से राष्ट्रीय कार्ययोजना पर काम क रहा है और चीन आतंक के खिलाफ कार्रवाई के लिए उसे प्रोत्साहित कर रहा है।