
पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र की दूसरे दिन की कार्यवाही शुरू हो गई है। अकाली विधायक व आम आदमी पार्टी सोमवार को अलग-अलग काम रोको प्रस्ताव लेकर आए, जिसे स्पीकर ने अस्वीकार कर दिया। इसके बाद अकाली व भाजपा विधायक नारेबाजी करते हुए वेल में आ गए। अकाली दल का कहना है उसने स्पीकर के दफ्तर में 8.05 बजे प्रस्ताव रिसीव करवा दिया था। वहीं, स्पीकर ने कहा कि नियमानुसार सत्र की बैठक शुरू होने से 2 घंटे पहले प्रस्ताव देना होता है, आज की बैठक 11 बजे से शुरू हुई थी।
अकाली दल विधायकों के हंगामे के दौरान आम आदमी पार्टी के विधायक कुलतार संधवा ने अकाली दल पर हमला किया। इससे आप व अकाली विधायक आपस में उलझ गए। वहीं, आप भी काम रोको प्रस्ताव लेकर आई थी, जिसे खारिज किए जाने के बाद वह उसके 10 विधायक वेल में आ गए। आप विधायक जैसे ही वेल में पहुंचे कंंवर संधू और पिरामल सिंह सदन से बाहर चले गए। इसके बाद आप ने सदन से वाकआउट कर दिया।
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब आबकारी (संशोधन ) बिल 2019 पेश किया। विपक्ष की अनुपस्थिति में इस बिल को बगैर बहस के पास कर दिया गया। सदन में खेल मंत्री राणा गुरमीत सिंह ने महाराज भूपेंदर सिंह पंजाब खेल यूनिवर्सटी बिल पेश किया। इसेे भी बिना बहस पास कर दिया गया।
जब स्पीकर ने मंत्री से कहा कि मोबाइल नहीं सुन सकती
ट्रांसपोर्ट मंत्री रजिया सुल्तान सदन में मोबाइल फोन सुन रही थी। जिस पर विपक्ष के नेता हरपाल चीमा ने स्पीकर से कहा कि क्या सदन में मंत्री मोबाइल सुन सकती हैंं। इस पर स्पीकर ने मंत्री से कहा, मोबाइल नहीं सुना जा सकता है। इसके बाद मंत्री ने तुरंत फोन बंद कर दिया।
मानसून सत्र में असली परीक्षा विपक्ष की
आमतौर पर विधानसभा में सत्ता पक्ष की अग्निपरीक्षा होती है, लेकिन पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र में असली परीक्षा विपक्ष की होने जा रही है। आप ने महंगी बिजली और शिअद ने नशे व बेअदबी मामले पर सरकार की घेराबंदी की रणनीति बनाई है। मुख्य विपक्षी दल आम आदमी पार्टी के विधायकों की संख्या हर सत्र में कम हो रही है। वहीं, सुखबीर बादल के सांसद बनने के बाद शिरोमणि अकाली दल का नेतृत्व भी बदल गया है। ऐसे में सारी कमान अब शिअद विधायक दल के नेता परमिंदर ढींडसा के हाथों में है कि वह दो तिहाई बहुमत वाली कांग्रेस पार्टी के सामने कितनी मजबूती के साथ खड़े होते हैं।
विधानसभा में कांग्रेस की स्थिति काफी मजबूत है। 117 विधायकों में से 78 विधायक कांग्रेस के हैं। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पहले ही अपने विधायकों को आक्रामक रुख रखने की सलाह दे चुके हैं। ऐसे में असली परीक्षा विपक्ष की है। 20 विधायकों के साथ मुख्य विपक्षी पार्टी की कुर्सी पर बैठने वाली आप हर सत्र के साथ बिखरती जा रही है।
सुखपाल खैहरा व एचएस फूलका पहले ही आप से इस्तीफा दे चुके हैं, जबकि लोकसभा चुनाव में नाजर सिंह मानशाहिया, अमरजीत सिंह संदोआ कांग्रेस पार्टी में शामिल होकर अपना इस्तीफा दे चुके हैं। फरीदकोट से लोकसभा चुनाव लडऩे के बाद मास्टर बलदेव सिंह पार्टी से इस्तीफा दे चुके हैं। कंवर संधू आप से सस्पेंड चल रहे हैं, जबकि अमन अरोड़ा भी नाराज चल रहे हैं। वह भी अपनी पार्टी से दूरी बना रहे हैं। ऐसे में आम आदमी पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती विधानसभा में अपने अस्तित्व को बचाए रखने की होगी। नेता प्रतिपक्ष हरपाल चीमा कह चुके हैं कि उनका ध्यान लोगों के मुद्दे उठाने को लेकर है।
वहीं, पहली बार विधानसभा में पार्टी की कमान संभाल रहे परमिंदर ढींडसा सरकार को खुली चुनौती दे चुके हैं कि अगर सरकार को हंगामा ही पसंद है, तो वो क्या कर सकते हैं। ढींडसा का कहना है कि सरकार को पता नहीं किस बात का डर है। सरकार के पास भारी बहुमत है। इसके बावजूद सरकार दो दिन का छोटा सत्र रख कर पंजाब के मुद्दों से भागना चाहती है। विपक्ष बेअदबी कांड को लेकर सीबीआइ की क्लोजर रिपोर्ट, जेलों में हुई हत्याओं व आगजनी की घटनाओं समेत ड्रग्स जैसे मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
कांग्रेस को अपने ही विधायकों का डर
सरकार ने भी विपक्ष का समाना करने की तैयारी कर रखी है, लेकिन सत्ता पक्ष को सबसे ज्यादा डर इस बात को लेकर है कि कहीं उनके विधायक ही विपक्ष की भूमिका में न आ जाए। ऐसा भय इसलिए भी है कि सार्वजनिक मंच या विधायक दल की बैठकों में कांग्रेस के विधायक सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में तय है कि सत्र भले ही दो दिन का है, लेकिन अकाली दल व आप की सियासी पारी कैसी रहेगी यह सत्र में ही तय होगा।