
रामनगरी अयोध्या से 20 किलोमीटर दूर गोसाईगंज इलाके में रैली को संबोधित करते हुये प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि श्रीलंका में क्या हुआ, कुछ यही स्थिति 2014 से पहले भारत में थी। अयोध्या और फैजाबाद में कैसे कैसे बम धमाके हुए, कोई इसे भूल सकता है क्या? वे दिन कैसे भूल सकते हैं जब देश में आये दिन आतंकी हमला होता था। पिछले पांच साल में बम धमाकों की खबरें आनी बंद हुई हैं। हमारे पड़ोस में आतंक की फैक्ट्री अभी चल रही है। ये आतंकी देश में एक कमजोर सरकार के इंतजार में हैं। ये मौके की ताक में बैठे हैं।
उन्होंने कहा कि जैसे सड़कों पर लिखा रहता है- सावधानी हटी, दुर्घटना घटी। ये आतंकवाद का खेल भी ऐसा है। सावधानी हटी नहीं, मौत का बुलावा आया नहीं। यह बात इसलिए अहम है सपा, बसपा या कांग्रेस हो या कोई भी महामिलावटी हो, इनका आतंक पर नरमी का पुराना रेकॉर्ड रहा है। सुरक्षा एजेंसियां आतंक के मददगारों को पकड़ती थी, ये वोट के लिए उन्हें छोड़ देते थे आज यह महामिलावटी केंद्र में एक बार फिर मजबूर सरकार बनाने की फिराक में है।
प्रधानमंत्री ने श्रमिक दिवस एक मई को ध्यान में रखते हुए कहा कि ‘जब मैं 2014 में सरकार में आया तो पता चला कि पहले की पेंशन स्कीम के तहत जो व्यवस्था थी उसमें किसी को 50 रुपये, किसी को 60 रुपये, किसी को 70 रुपये मिल रहा है। हमारी सरकार ने एक ही झटके से यह सब बंद करके तय किया कि जिनको पेंशन मिलता है, उन्हें कम से कम 1000 रुपये जरूर मिलेगा, इससे हमारी सरकार पर हजारों करोड़ का बोझ लद गया।’
मोदी ने कहा कि ‘हमारे देश के 40 करोड़ से ज्यादा श्रमिक भाइयों-बहनों की विपक्षी पार्टियों ने परवाह नहीं की। श्रमिकों को वोट बैंक में बांटकर इन लोगों ने अपना और अपने परिवार का फायदा करवाया। कोई गरीब अपने बच्चे को गरीब नहीं देखना चाहता। कोई चायवाला यह नहीं सोचता कि उसका बच्चा बड़ा होकर चायवाला बने। गरीब और मजदूर आगे बढ़ना चाहता है।