कल्बे जव्वाद साहब के नाम एक खुला ख़त

इज़्ज़तमोआब
किब्ला ओ काबा, हुज्जतुल इस्लाम, आफ़ताब ए शरीयत ,गौहरे नायाब ए मिललते शीयत, मिसाल ए इंसनियत, आलीजनाब मौलाना कल्ब ए जव्वाद साहब किब्ला…..

आपसे मुख़ातिब होने की जसारत कर रही हूं…… गो इल्म अदब मुतालिया और अंदाज़ ए गुफ़्तगू में आफ़ताब के मुकाबले एक ज़र्रा भी नहीं मगर…..

मैं क़तरा होके भी तूफ़ां से जंग लेता हूँ….
मुझे बचाना समंदर की ज़िम्मेदारी है।।

मैं नहीं जानती मुझे ज़ेब देता है या नहीं, मुझे हक़ है या नहीं मेरा रोल बनता है या नहीं मैं इस लायक़ हूँ या नहीं
मगर मेरे ज़ेहन में उठा है एक #सवाल
F B पर माननीय श्री राजनाथ सिंह जी A Big Personality of Political Party B j P के साथ वायरल एक V D O देखकर जिसमें आप उन्हें
#मौलाएकायनातहज़रत #अमीरुलमोमेनीनग़ालिबकुल्ले_ग़ालिब
#अलीइब्नेअबीतालिब के खुतबों की पाक किताब #नहजुलबलाग़ा बतौर तोहफ़ा दे रहे हैं ये कहकर कि इसमें #मालिकेअश्तर के नाम #हज़रतअली के ख़ुतूत हैं जिनमें उन्होंने ये लिखा है कि सियासी हुकूमत कैसे चलाई जाती है …… मासेवा इसके ये भी कि ये एक बहोत अच्छे इंसान हैं ये मैं ज़ाती तौर प भी जानता हूँ……

तो मैं आपसे बहोत साफ़ लफ़्ज़ों में ज़ाती तौर पर ये सवाल कर रही हूं कि क्या “आपका ये जुमला क़ओंम से एक #इशारा है ” Bjp” को सपोर्ट करने का ?
क्योंकि जनाब आप कोई इंफेरादि शख़्सियत के मालिक नही हैं मेरी तरह, आप उस क़ओंम के नुमाइंदे हैं जिसका वाहिद रहबर आज भी सरज़मीन ए आलम पर मौजूद है और ग़ैबते कुबरा में है और जो ज़ालिमों सेअपने आबा ओ अजदाद के खून ए नाहक़ का बदला लेने के लिए बज़ाहिर खून के आंसू बहा रहा है।।

आप गोधरा कैसे भूल सकते हैं
आप पुलवामा कैसे भूल सकते हैं
आप कश्मीर कैसे भूल सकते हैं
आप सिलेंडर गैस के नहोने की वजह से गोरखपुर अस्पताल के उन 40 बच्चों की मौत कैसे भूल सकते हैं
आप अलीगढ़ के हालात कैसे भूल सकते हैं
आप लाखों क़सआइयों की बेरोज़गारी कैसे भूल सकते हैं
आप ट्रैन में बेदरदाना मज़लूमों का क़त्ल कैसे भूल सकते है, आप आसिफ़ा को कैसे भूल सकते हैं
आप वो जुमला कैसे भूल सकते हैं कि ” तुम रक्खो अपने अली , काफ़ी हैं हमें बजरंग बली “…….

और भी बहोत कुछ है नाजायज़ जो फ़ज़ाओं में गूंज रहा है जिसे मैं साफ़ सुन नहीं सकती , बहोत कुछ है ज़ालिमों का तशद्दुद जिसे मैं साफ़ देख नहीं सकती ……. क्योंकि मैं एक लाशऔर जाहिल और तंग नज़र घरेलू औरत हूँ…
मगर इतना मालूम है कि “समंदर की हर बूंद खारी है, वो पेट में पहुंचने पर आतिशे प्यास को दोबाला ही करेगी ,
तिशनालब को सेर नहीं कर सकती, और अगर उसे खारे से मीठा बनना है तो समंदर के दामन से निकल कर दरिया मैं पहुंचना होगा- आबे कौसर में उसे तब्दील कर देना तो फिर शाने रब्बुलिज़्ज़त है,

ज़ाती तौर पर भी अच्छा होने की दलील- बरसों से अमामे वाले हमें बताते रहै हैं कि हक़ ओ बातिल का इल्म हो जाने पर यज़ीदी लश्कर को यानी ज़ाहिरी इक़्तेदार को अलविदा कहकर #जनाबे #हुर #अस. किस तरह उसे छोड़कर मज़लूम हुसैन के कदमों में आन पड़े थे ।

मौलाना साहब हम लोग जो आपकी आवाज़ पर लबबैक कहकर घरों से निकल पड़ते हैंऔर हमें उन्हें आपके #हक़ पर होने की दलील भी ग़ैरों को देनी पड़ती है, बच्चों को स्कूल से छुड़ाकर आपकी मजलिस में जब घुफरानेमोब के इमामबाड़े में लेकर आते है तो आपकी शफ़्फ़ाफ़ शख्सियत के पहलू भी गिनाने पड़ते हैं……..

मातमी दस्ते जो सुस्त हुए ,सफों पर जो मजमा कम हुआ,
रिक्क़त ओ मारेफ़त में जो कमी आयी, इमामे ज़माना के नाम के फंड के जो बक्से नहीं भर रहे……. इसकी वजह महज़ क़ओंम की गुमराही नहीं शायद हमारे #रहबरों के चेहरों पे चेहरे भी हैं……

RSS ka Vision letter agr apko wo ye कह कर denge ki aap bhot achchhe insan hain” jo ki aap hain bhi,” to kya aap usko Follow krenge, ? phir jinke yhan #Satta लाभ के लिए साम दाम दंड भेद सब जायज़ है,,,,,उनके लिए #नहजुल #बलाग़ा का क्या मोल, उनकी किताब गीता है जिसमें भीष्म पितामह सिंहहासन से बंधे होने की वजह से कौरवों के हाथों #द्रौपदी की लुटती हुई अस्मत पर भी खामोश रहे।

इज़्ज़तमोआब जनाब कल्बे जव्वाद साहब हो सकता है मेरे ये दर्राना सवाल एक आलिम एक रहबरे मिल्लत से मेरी कबीरा ख़ता हो, जाहिलाना गुस्ताखी हो मगर इसमें क़तई कोई शक नहीं कि ये सवाल मेरे सच्चे दिल साफ़ ज़हन और हक़ गोई की ताक़त से निकले हैं और पूरी ईमानदारी से मैंने उनहें आपके सामने रखा है.

हमें सिर्फ़ वक़्फ़ की ज़मीन पर कब्ज़ा या उसका हिसाब ही नही चाहिए…….. अपने रहबरों के क़ोल/फ़ेल उनके इज्तेमाई/इंफेरादि पहलुओं की वाज़ेह दलील भी चाहिए

और अगर जवाब इतमीनान कुन हैं तो #राजनाथ जी के लिए मैं भी वोट बैंक बन जाने की हर मुमकिन क़वायद करूँगी
मैं लीडर तो नहीँ लेकिन अगर चाह लूँ तो किसी लीडर से कम भी नहीं ।।

पब्लिक के तमाम रद्दे अमल के पहले यह बात साफ़ कर देना चाहती हूं कि पूरी तवज्जो के साथ पहले मेरी पोस्ट को पढ़िये ,और बिना मेरी प्रोफाइल खंगाले Reactions Comments aor likes dijiye, सिर्फ़ इसी पोस्ट की रौशनी में…
हाँ एक फ़ेवर चाहती हूं #दोस्तों कि इस पोस्ट को शेयर करके #मौलाना साहब तक पहुंचा दीजे, बड़ी मेहरबानी होगी।

इस पोस्ट के ज़रिए मेरा मक़सद किसी का भी दिल दुखाना या मेरा कोई ज़ाती मफाद नहीं है और न ही मैं किसी सियासी पार्टी से जुड़ी हूँ ।
निहायत माज़ेरत के साथ 🙏🙏🙏🙏🙏

लबबैक या हुसैन…….
जय हिंद………. जय भारत

#मेरी ही ✍ #क़लम से ।।