
सिधौली -सीतापुर: महिलाएं जब तक शिक्षित नहीं होगी तब तक देश की तरक्की नामुमकिन है इस लिए महिलाओं को शिक्षित करना हम सबकी जिम्मेदारी है यह बात मिशन महापुरुष मूवमेंट मंच के तत्वाधान में मंझारी गांव में आयोजित शिक्षा की साक्षात प्रतिमूर्ति सावित्री बाई फुले के पुण्यतिथि के मौके पर एक कार्यक्रम में अध्यक्ष राजेश कश्यप ने कही.
उन्हों ने आगे कहा कि जिस समय महिलाओं को शिक्षा हासिल पाप माना जाता था उस समय सावित्री बाई फुले ने इस वर्जना को तोड़कर महिलाओं को शिक्षित करने की वीणा उठाया था l जब वह बालिकाओं को शिक्षित करने जाती थी तब तथाकथित लोगों के साथ ही महिलाएं भी इन पर तंज ही नहीं कसती थी अपितु गोबर आदि फेंकती थी l इस समस्या के निदान के लिए माता सावित्री बाई फुले एक अतिरिक्त धोती भी ले जाती थी ताकि एक के गन्दी होने पर दूसरी धोती पहन सके.
इस तरह से महिलाओं के शिक्षित करने की राह सावित्री बाई फुले ने ही प्रशस्त किया इसलिए भारतवासी इन्हें शिक्षा की साक्षात प्रतिमूर्ति भी कहते हैं l कवि व सामाजिक चिंतक देवेन्द्र कश्यप ‘निडर’ ने सावित्री बाई फुले को नमन करते हुए कहा कि सावित्री बाई ने ही आधी आबादी की जिन्दगी में रोशनी देकर महिलाओं के साथ इन्होंने बहुत बड़ा उपकार किया है मगर आज देश का दुर्भाग्य है कि महिलाएं अपने इस उद्धारक का नाम जानती तक नहीं और न ही जिम्मेदार माता सावित्री बाई फुले का प्रचार प्रसार करने में सम्यक् सहयोग देते है इसलिए जिम्मेदारों को इस हठधर्मिता को त्याग देना चाहिए उन्होंने कविता के जरिए बालिका शिक्षा सम्वर्धन के लिए अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए कहा कि–
“अम्मा मै भी पढ़ने जाऊँगी , भईया के संग जाऊँगी ; बनकर तेरी रानी बिटिया : जग में नाम कमाऊँगी l
इस अवसर पर लवलेश राज ने कहा कि सावित्री बाई फुले के शैक्षिक योगदान को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता l आज आवश्यकता है कि सरकार इस पिछड़े क्षेत्र में सावित्री बाई फुले के नाम से कोई शैक्षिक संस्था खोले ताकि सावित्री बाई फुले को सच्ची श्रद्धाञ्जलि पेश की जा सके इस मौके पर डीसी रावत , संजय राज , कमलेश निषाद , बबलू राजवंशी , हर्षिता राज सहित दर्जनों लोगों की मौजूदगी नजर आई.