अगर आप हैं इस ऋण से पीड़ित तो जीवन में हमेशा बनी रहेगी परेशानी…

जन्मकुंडली में चंद्र पर राहु—केतु का प्रभाव एवं उपाय जन्मकुंडली में अगर चंद्र पर राहु केतु या फिर शनि का प्रभाव होता हैं,तो जातक मातृ ऋण से पीड़ित होता हैं। चंद्रमा मन का प्रतिनिधि ग्रह होता हैं। ऐसे जातक को निरंतर मानसिक अशांति से भी पीड़ित होना पड़ता हैं। ऐसे व्यक्ति को मातृऋण से मुक्ति के पश्चात ही जीवन में शांति प्राप्त होना संभव होता हैं।

वही पितृ ऋण के कारण मनुष्य को मान—प्रतिष्ठा के अभाव से पीड़ित होने के साथ ही साथ संतान की ओर से कष्ट, संतानाभाव, संतान का स्वास्थ्य खराब होने या फिर संतान का सदैव बुरी संगति जैसी स्थितियों में रहना पड़ता हैं। अगर संतान अपंग, मानसिक रूप से विक्षिप्त या फिर पीड़ित होती हैं,तो व्यक्ति का संपूर्ण जीवन उसी पर केंद्रित हो जाता हैं। जन्मपत्री में अगर सूर्य पर शनि, राहु केतु की दृष्टि या फिर युति द्वारा प्रभाव हो तो जातक की कुंडली में पितृ ऋण की स्थिति मानी जाती हैं।

वही ज्योतिष के मुताबिक देव ऋण अर्थात देवताओं के ऋण से भी हम पीड़ित होते हैं। हमारे लिए सर्वप्रथम देवता हैं। हमारे माता—पिता परंतु हमारे इष्टदेव का स्थान भी हमारे जीवन में महत्वपूर्ण होता हैं। वही व्यक्ति भव्य व शानदार बंगला बना लेता हैं। अपने व्यावसायिक स्थान का भी विस्तार कर लेता हैं, किंतु उस जगत स्वामी के जगह के लिए सबसे अंत में सोचता हैं या फिर सोचता ही नहीं हैं। जिसकी अनुकंपा से समस्त ऐश्वर्य, वैभव व सकल पदार्थ प्राप्त होता हैं। वही उसके लिए घर में कोई स्थान नहीं होगा, तो व्यक्ति को देव—ऋण से पीड़ित होना पड़ेगा।