चौकीदार कौन है !

किसी ग़ैर लड़की से उसकी उम्र मत पूछिएगा.. अखबार के मालिक से उसके अखबार का सर्कुलेशन मत पूछिएगा.. किसी मर्द से उसकी तनख्वाह मत पूछिएगा।

आप लड़की के ब्वाय फ्रेंड हैं तो उसकी उम्र पूछ सकते हैं। और यदि लड़की से आपका दोस्ती या किसी किस्म का कोई रिश्ता नहीं और गैर होकर आप लड़की से जबरन सवाल करेंगे तो जवाब नहीं मिलेगा। जवाब मालुम करने के लिए कोर्ट चले जायेंगे तो कोर्ट आपके सवाल को ही खारिज कर देगा। न्यायालय दो अंजानों या प्रतिद्वंद्वियों के बीच में पड़ने से बचता है। न्यायालय खासकर राजनीति मोहरा बनने के लिए समय नहीं गवाता।

आप विज्ञापन दाता या पाठक हैं तो अखबार मालिक से अखबार का सर्कुलेशन पूंछ सकते हैं। पत्नी अपने मर्द का वेतन भी पूछ सकती है। ब्याॅय फ्रेंड को अपनी गर्लफ्रेंड से उसकी उम्र पूछने का हक है। जहां कोई रिश्ता हो वहां सवाल पूछने का हक होता है। वहां सवाल का जवाब देना ही पड़ता है। नहीं तो सवाल का जवाब ना देने की कोई खास वजह ही बताना पड़ेगी।

जनता का हुकूमत के बीच पारदर्शी रिश्ता होता है। जनता का सरकार से सवाल करने का हक़ होता है। सरकार जनता के सवाल का जवाब नहीं देती तो जनता इलेक्शन में जवाब दे देती है। तमाम सियासी मुद्दों में कोर्ट नहीं पड़ना चाहता। ऐसे राजनीतिक मुद्दों को नजरअंदाज करना पड़ता है। दरअसल ये मुद्दे सीधे जनता की अदालत के होते है। यहां जनता ही फरियादी भी होती है.. वकील भी होती है और न्यायधीश भी होती है।

तमाम सवालों में सबसे अहम सवाल ये है कि राफेल कितनी कीमत में खरीदा गया। ये सवाल अब कांग्रेस या राहुल गांधी का ही नहीं देश की जनता का सबसे अहम सवाल बन गया है। कांग्रेस और भाजपा की लड़ाई के बीच उभरे कांग्रेस के सवालों के कीमत वाले बिन्दु पर न्यायालय कुछ नहीं बोला। किन्तु देश की जनता जब सरकार से राफेल की कीमत पूछने लगी है तो सरकार को जनता के इस सवाल का जवाब देना ही पड़ेंगे। नहीं तो जनता खुद जवाब दे देगी।

राफेल डील की रकम बताईये! कांग्रेस का जवाब मत दीजिए। राहुल गांधी का उत्तर मत दीजिए। मुझे तो जवाब दीजिए।सवा सौ करोड़ की जनता के सवालों का जवाब तो देना ही पड़ेगा।

राफैल की खरीद कितनी रकम मे हुई ! क्या ये सच है कि कई गुना बढ़े हुए दामों में राफेल का सौदा हुआ ! ऐसा क्यों! कीमत ना बताने का क्या कारण है ! क्या सुरक्षा कारणों से कीमत छुपाई जा रही है ! या सौदे के वक्त ये अनुबंध हुआ था कि कीमत सार्वजनिक नहीं करेंगे। जो भी कारण हैं एक प्रेस कांफ्रेंस में साफ-साफ ये सब कारण बताकर देश की जिज्ञासा शांत कर दीजिए।

एच. ए. एल. से राफेल को दूर रखने की वजह भी जरूर बताइयेगा। ये भी बेहद गंभीर प्रश्न है।

मां के दूध पर बच्चे का हक होता है। बच्चे को मां का दूध ना पिलाकर बकरी का दूध क्यों पिलाया गया ! क्या मां का दूध खुश्क हो गया है ! मां का दूध सूख जाने की क्या वजह है ! क्या मां को पौष्टिक आहार नहीं मिलता ! क्यों नहीं मिलता !
मां के शरीर में पंहुचने वाले पौष्टिक आहार को क्या बकरी खा गयी ! चौकीदार भी तो था। वो क्या कर रहा था ! क्या उसने अपना मुंह फेर लिया था ! क्या मां की खुराक को बकरी और चौकीदार ने मिलजुल कर खा लिया !
एच. ए. एल. एक मां की तरह है और राफेल उसके बच्चे की तरह। इन दोनों को अलग करके बीच में बकरी क्यों ले आये ! चौकीदार क्या कर रहा था! चौकीदार का बकरी से कौन सा रिश्ता है ! मिलीभगत का तो नहीं!

मां एच. एल. एल. और मां के बच्चे राफेल के बीच बकरी यानी अंबानी ग्रुप को क्यों ले आया चौकीदार!
चौकीदार कौन है ???

-नवेद शिकोह
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