
इस यात्रा सीजन के दौरान केदारनाथ धाम में स्थानीय उत्पादों से तैयार 1.30 करोड़ रुपये का प्रसाद बेचा गया। इस प्रसाद को दो हजार से अधिक स्थानीय महिलाओं ने तैयार किया। इस सफलता से जिला प्रशासन भी उत्साहित है और उसने आगामी यात्रा सीजन में प्रसाद की बिक्री को तीन गुना करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए अभी से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
इस वर्ष केदारनाथ यात्रा शुरू होने से पूर्व जिला प्रशासन ने स्थानीय उत्पादों से तैयार प्रसाद यात्रियों को देने का निर्णय लिया था। इसके तहत प्रशासन व श्री बदरी-केदार मंदिर समिति के प्रयास से दो सौ स्वयं सहायता समूहों ने प्रसाद बनाने का कार्य शुरू किया।
29 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट खुले और मात्र चार दिन में ही दस लाख रुपये के प्रसाद की बिक्री हो गई। सोनप्रयाग में स्टोर बनाकर वहां से प्रसाद को केदारनाथ पहुंचाया गया। प्रसाद के दो लाख पैकेट तैयार किए गए, जो सभी बिक्री हो गए।
30 रुपये से सौ रुपये तक है कीमत
प्रसाद रिंगाल की टोकरी, जूट व कपड़े का थैलों व कागज के पैकेट में दिया गया। प्रसाद की कीमत कागज के पैकेट में 30 रुपये, जूट व कपड़े के बैग में 65 रुपये और ङ्क्षरगाल की टोकरी में सौ रुपये रखी गई।
चौलाई की कीमत में आया उछाल
प्रसाद की बिक्री बढ़ने के साथ ही केदारघाटी में न सिर्फ चौलाई की मांग बढ़ी है, बल्कि इसकी कीमत में भी उछाल आया है। प्रसाद बनाने से पहले चौलाई की कीमत 25 रुपये प्रति किलो थी। लेकिन, अब यह 45 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रही है।
यह है स्थानीय प्रसाद
चौलाई का लड्डू, चौलाई का चूरमा, स्थानीय जड़ी-बूटियों से तैयार धूप बत्ती, शहद व गंगा जल।