वसीम रिज़वी..अयोध्या और साजिश

असली मुसलमान वो होता है जिसका इमान मुसल्लम हो। ऐसे ही संघी होने के लिए संघ के साथ दीक्षा लेना पड़ती है। कड़ा परिश्रम, राष्ट्रवाद और हिन्दुत्व के सिद्धांतों पर अमल करना पड़ता है। सिर्फ बयानबाजी संघी नहीं बना देती। संघ के एजेंडे पर काम करने के लिए कड़े अनुशासन के साथ काम करना पड़ता है। राॅ से भी ज्यादा खामोशी, पाकीजगी, डिसिप्लिन और साफ नियत के साथ। यानी हम पार्टी के फायदे के लिए काम करें तो पार्टी को भी खबर ना हो। सरकार की लम्बी जिन्दगी के लिए काम करें तो सरकार के मुखिया को भी खबर ना हो।
सूत्रों के अनुसार संघ के लिए या संघ के एजेंडे पर या फिर संघ को खुश करने के लिए एक बड़े बजट की फिल्म के निर्माण पर काम शुरू हुआ।
लोकसभा चुनाव से पहले राम मंदिर के मुद्दे में फैली गरमाहट की आग में घी का काम करना इस फिल्म का मकसद है।
राम मंदिर निर्माण के पक्ष में माहौल बनाने का काम कर रहे शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिज़वी ‘अयोध्या’ नाम की फिल्म निर्माण के प्रोजेक्ट पर पिछले दो महीने से काम कर रहे हैं। दुर्भाग्य ये कि ये फिल्म अब भंवर में फंस गई है। आउटडोर शूटिंग के कारण फिल्म निर्माण को गुपचुप तरीके से बनाने में पहले ही तमाम अड़चनें आ गयीं। लोकल मीडिया फिल्म का नाम जानने पर अड़ गयी तो उसे ‘जिला फैजाबाद’ जैसा गलत नाम बताकर निजात पायी गयी।

फिर दशहरे के दिन की शूटिंग में हंगामे की गंभीरता को किसी तरह दबाया गया। लेकिन फिल्म यूनिट के एक डायरेक्टर ने भावुक होकर फेसबुक लाइव में हिन्दुत्ववादावियों को कश्मीर के आतंकवादियों से बद्तर बता दिया। वो बोले- हम लोग बेहद सीक्रेट तरीके से दशहरा के दिन एक संवेदनशील विषय वाली फिल्म की शूटिंग फैजाबाद के रामलीला मैदान में कर रहे थे। फिल्म का सीन ये था कि एक धर्म विशेष से जुड़ा चरित्र एक महिला को दौड़ा रहा है। ये जानकर भी कि ये फिल्म की शूटिंग है कुछ कट्टरवादी फिल्म के कलाकार के साथ मारपीट करने लगे। शूटिंग रूक गयी। कलाकार भाग गया। जबकि हम आतंकवादियों से प्रभावित कश्मीर के इलाकों में इलाकेवासियों के पूरे सहयोग के साथ पूवुरसुकून तरीके से शूटिंग करके आये हैं। फिल्म के निर्देशन मंडल के एक निर्देशक फेसबुक लाइव पर बोले- मैं थूकता हूं ऐसे कट्टरवादियों पर। (वीडियो मौजूद है।)

खैर इन तमाम मुसीबतों के साथ फिल्म निर्माण का सिलसिला जारी ही था कि निर्माता मंडल के एक सदस्य पर एक महिला कलाकार ने कास्टिंग काउच जैसा गंभीर आरोप लगा दिया और वो जेल चले गये। ये आरोपी शिया वक्फ बोर्ड के सदस्य हैं। फैजाबाद के चर्चित बहु बेगम के इमामबाड़े के मुतावल्ली हैं। चैयरमेन वसीम रिजवी के बेहद करीबी हैं। बताया जाता है कि शारीरिक शोषण के ये आरोपी बोर्ड में डिप्टी चेयरमैन की हैसियत रखते हैं।

ये आरोप झूठे हैं.. सच्चे हैं या कोई साजिश है, ये फैसला तो कोर्ट करेगा लेकिन फिलहाल कथित राजनीतिक महत्वाकांक्षा वाली इस फिल्म की गर्मागर्म और रसीली जलेबी में चीटियां लग चुकी हैं।
और अब ये फिल्म यदि बन भी जाती है और अपने मकसद को अंजान देने की कोशिश करती हैं तो विरोधी महिला शोषण के आरोपों के हथियार से इस फिल्म को उसके मकसद में कामयाब नही होने देंगे।

इसलिए माना जा सकता है किए खास विषय वाली इस फिल्म को बनवाने वाली बड़ी ताकत अब शायद अपना हाथ पीछे कर लें।
क्योंकि अब वसीम विरोधी मौलाना एण्ड पार्टी के लोगों ने वसीम रिजवी के करीबी बोर्ड सदस्य द्वारा कास्टिंग काउच जैसे मामले को तूल देने का अभियान तेज कर दिया है।

बताया जाता है कि तमाम वक्फ माफियाओं, बोर्ड सदस्यों और मुतावल्लियों के कलेक्शन से ये फिल्म फाइनेंस हो रही है। जबकि सबसे बड़ी रकम वो बड़ी ताकत लगा रही है जिसे बताया जा रहा है कि उसके ही इशारे पर एक खास मकसद के लिए फिल्म की स्क्रिप्ट तैयार की गयी है।

-नवेद शिकोह
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