
सीबीआइ रार पर विपक्ष ने भी मोदी सरकार पर वार करना शुरू कर दिया है। तमाम विपक्षी दल सीबीआइ चीफ पर हुई कार्रवाई को राफेल सौदे की जांच से जोड़कर देख रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी सीबीआई मामले को राफेल से जोड़ते हुए केंद्र सरकार पर हमला बोला।
राजस्थान के झालावाड़ में राहुल गांधी ने एक रैली कर कहा कि कल रात चौकीदार ने सीबीआइ निदेशक को हटा दिया। सीबीआइ निदेशक ने राफेल सौदे पर सवाल उठाए थे और उनको हटा दिया गया।
राहुल ने कहा, ‘सीबीआइ चीफ आलोक वर्मा राफेल घोटाले के कागजात इकट्ठा कर रहे थे। उन्हें जबरदस्ती छुट्टी पर भेज दिया गया। प्रधानमंत्री का मैसेज एकदम साफ है जो भी राफेल के इर्द- गिर्द आएगा। हटा दिया जाएगा, मिटा दिया जाएगा। देश और संविधान खतरे में हैं।’
विपक्षी दलों ने क्या कहा?
डीएमके चीफ एमके स्टालिन- क्या सीबीआई में फेरबदल राफेल की जांच रोकने के लिए किया गया है। इससे पता चलता है कि देश में अघोषित आपातकाल है। नागेश्वर राव जैसे लोगों की नियुक्ति सीबीआई को ‘पिंजरे का तोता’ बनाए रखने के लिए की गई है। सीबीआइ डायरेक्टर नागेश्वर राव के खिलाफ कई शिकायतें भेजी जा चुकी हैं, साथ ही यह रिपोर्ट भी आ रही है कि आलोक वर्मा राफेल मामले की जांच करना चाहते थे।
शिवसेना सांसद अरविंद सावंत- सीबीआइ, सीवीसी, न्यायपालिका, चुनाव आयोग जैसी संस्थाएं लोकतंत्र के स्तंभ हैं…। यह वास्तव में बेहद दुःखद है कि शीर्षतम जांच एजेंसी के प्रमुख ही एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं। यह संसद के आगामी सत्र के लिए बड़ा मुद्दा है।’
अभिषेक मनु सिंघवी- आलोक वर्मा को असंवैधानिक तरीके से हटाया गया है। केंद्र सरकार राफेलोफोबिया से पीड़ित है, इसीलिए केंद्र ने डायरेक्टर को हटाया। डायरेक्टर को हटाने के लिए सरकार ने गलत तरीकों का इस्तेमाल किया। सीबीआइ एक्ट का उल्लंघन किया गया है। उन्हें हटाना संभव नहीं, इसीलिए छुट्टी पर भेजा गया है।