जेट एयरवेज में टाटा की दिलचस्पी, सौदा मुश्किल

नगदी संकट से जूझ रही जेट एयरवेज की हिस्सेदारी खरीदने को लेकर टाटा समूह भी अपनी दिलचस्पी दिखा रही है। हालांकि जेट पर नियंत्रण को लेकर वार्ता आगे नहीं बढ़ पाई है। फिलहाल, जेट प्रबंधन और टाटा समूह वेट एंड वॉच की भूमिका में है। देश में हवाई सेवा के क्षेत्र में 25 वर्ष पूरा करने वाली जेट एयरवेज एकमात्र कंपनी है। लेकिन पिछले कुछ माह से जेट वित्तीय संकट से जूझ रहा है। इसका नेटवर्क और देश के विभिन्न एयरपोर्ट पर स्लॉट भी काफी बड़ा है। हालांकि इस संबंध में टाटा समूह और जेट एयरवेज प्रबंधन ने कोई भी टिप्पणी से इंकार किया है। नई नीति अपनाए जेट एयरवेज उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जेट एयरवेज अपनी नीति में बदलाव लाए तो कंपनी तेजी से उबर सकती है। कंपनी के पास सालाना बार-बार यात्रा करने वाले 85 लाख से ज्यादा यात्री हैं। उनके लिए नई स्कीम लेकर आए। यात्री सफर के दौरान खाना खरीदकर खा सकें। ऐसी नई व्यवस्था शुरू करने से भी नए यात्री कंपनी की ओर आकर्षित होंगे।

चर्चा है कि एयर एशिया और विस्तारा में हिस्सेदारी रखने वाली टाटा समूह के साथ अगर डील होती है तो विमानन कारोबार एकीकृत हो जाएगा। लेकिन इस डील का सारा दारोमदार जेट एयरवेज के संस्थापक चेयरमैन नरेश गोयल पर निर्भर करता है जिनके पास कंपनी के 51 प्रतिशत शेयर हैं। लेकिन नगदी संकट से जूझ रहीं इस कंपनी में कई पायलटों और अधिकारियों को बिना वेतन छुट्टी पर भेज दिया गया है। वहीं, टाटा समूह एयर इंडिया में भी हिस्सेदारी खरीदने को इच्छुक थी लेकिन सरकार ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया है। हालांकि उद्योग विशेषज्ञों की माने तो टाटा समूह को एयर इंडिया के बजाए जेट एयरवेज में हिस्सेदारी खरीदना फायदे का सौदा है 

इसका नेटवर्क और देश के विभिन्न एयरपोर्ट पर स्लॉट भी काफी बड़ा है। हालांकि इस संबंध में टाटा समूह और जेट एयरवेज प्रबंधन ने कोई भी टिप्पणी से इंकार किया है। नई नीति अपनाए जेट एयरवेज उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जेट एयरवेज अपनी नीति में बदलाव लाए तो कंपनी तेजी से उबर सकती है। कंपनी के पास सालाना बार-बार यात्रा करने वाले 85 लाख से ज्यादा यात्री हैं। उनके लिए नई स्कीम लेकर आए। यात्री सफर के दौरान खाना खरीदकर खा सकें। ऐसी नई व्यवस्था शुरू करने से भी नए यात्री कंपनी की ओर आकर्षित होंगे।