
यह दशहरा पर रावण दहन नहीं था। एक अदने से कार्यकर्ता से बड़ा राजनेता बनने का जुनून था। कांग्रेस नेता मिट्ठू मदान ने दशहरा उत्सव मनाने के लिए हर नियम का उल्लंघन किया। पूर्व विधायक डॉ. नवजोत कौर सिद्धू को जोड़ा फाटक में दशहरा उत्सव में बुलाकर मिट्ठू अपना कद ऊंचा करना चाहता था। लेकिन, यहां कद और प्रतिष्ठा के चक्कर में दर्जनों लोगों की जिंदगी चली गई। हादसे के शिकार लोगों के परजिनों ने ‘राजनीति के रावण’ करार दिया है। लाेगों का कहना है कि इस घटना का प्रत्यक्ष कसूरवार आयोजक और जिला प्रशासन है। दूसरी ओर, इस कार्यक्रम के लिए लगाए गए पोस्टर पर हुई गलती चर्चा का विषय बन गई है। इस पर लिखा था, ‘ नेकी पर बदी की जीत’ यानि अच्छाई पर बुराई की जीत।
असल में जोड़ा फाटक में रावण दहन की प्रशासनिक इजाजत नहीं थी। दूसरी सबसे बड़ी चूक यह कि दशहरा दहन स्थल पर लगाई गई एलईडी लाइटों को रेलवे ट्रैक की ओर रखा गया। लोगों की आंखों में सीधे लाइट पड़ रही थी, इसलिए उन्हें रेल ट्रैक दिखाई नहीं दिया। हादसे की एक बड़ी वजह यह थी कि पुतलों के दहन के दौरान जबरदस्त आतिशबाजी हुई, जिस कारण लोग रेलगाड़ी और पटरियों के बीच घर्षण से उत्पन्न होने वाली आवाज और ट्रेन का हार्न नहीं सुन पाए। घायलों के अनुसार जौड़ा फाटक पर भी ट्रेन तेज रफ्तार से गुजरी।