
पानी प्रकृति की वह अमूल धरोहर है जिसे सहेजने में इंसान विफल साबित हो रहा है। अब इस मुद्दे पर सचेत करने वाली रिपोर्ट आई है जिसके मुताबिक भविष्य में पानी के लिए दंगे होंगे और ये तीसरे विश्व युद्ध की वजह बनेगा।
शोधकर्ताओं ने दुनियाभर में पांच क्षेत्रों को चिंहित किया है, जहां अगले सौ सालों में पानी को लेकर वैश्विक संघर्ष होगा। ग्लोबल एनवायरमेंटल चेंज में प्रकाशित इस रिपोर्ट के मुताबिक इसमें नील नदी, गंगा-ब्रह्मपुत्र, सिंधु, दजला-फरात (टाइग्रिस- यूफ्रेट्स) और कोलोराडो नदी शामिल हैं। इसके लिए मशीन लर्निंग तकनीक इस्तेमाल की गई है।
तीन फीसद पीने योग्य पानी
धरती की सतह पर मौजूद 71 फीसद पानी में 97 फीसद सागर और महासागर में खारा पानी है जिसे इंसान पीने और खाना पकाने के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकता है। महज तीन फीसद पानी पीने योग्य है जिसमें से भी 2.4 फीसद उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव पर जमा है। सिर्फ 0.6 फीसद नदियों, झीलों और तालाब के रूप में मौजूद है।
बढ़ेगा संघर्ष
- अगले पचास से सौ सालों में पानी को लेकर घोर संकट शुरू हो जाएगा।
- चिंहित स्थानों में से कई जगह पानी पूरी तरह से खत्म हो जाएगा।
- वर्तमान में पानी की कमी से जूझ रहे इलाके सबसे पहले सूखे की चपेट में आएंगे।