
भारत और वेस्टइंडीज के बीच हुए पहले टेस्ट मैच में अपने टेस्ट करियर का पहला मैच खेल रहे पृथ्वी शॉ ने बेहतरीन शतक लगाकर सबका दिल जीत लिया. शॉ का यह शतक केवल 99 गेंद पर आया. पृथ्वी की इस पारी की भारत के कई दिग्गज क्रिकेटर मुरीद हो गए. इनमें भारत में क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर भी शामिल रहे. सचिन ने शॉ की तारीफ करते हुए उनकी सबसे बड़ी खूबी के बारे में बात भी की. पृथ्वी शॉ की तुलना अक्सर सचिन तेंदुलकर से की जाती है. 
शॉ अपने टेस्ट शतक से पहले भारत के घरेलू अहम टूर्नामेंट रणजी ट्रॉफी और दिलीप ट्रॉफी में भी अपने पहले मैच में शतक लगा चुके हैं. इस मैच में शतक लगाने के बाद पृथ्वी ने कई रिकॉर्ड अपने नाम किए. वे सबसे तेज डेब्यू टेस्ट शतक लगाने वाले तीसरे खिलाड़ी बने. इसके अलावा शॉ डेब्यू टेस्ट मैच में शतक लगाने वाले सबसे कम उम्र में खिलाड़ी भी बन गए.
पृथ्वी के शतक लगाने के बाद सचिन तेंदुलकर ने उनकी तारीफ करते हुए कहा, “मेरे हिसाब से, हुनर होना एक बात है लेकिन आप अपने उस हुनर के साथ क्या करते हैं, यह ज्यादा अहम हो जाता है. यदि आप अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफल होना चाहते हैं, तो आपको तेजी से सीखने वाला बनना पड़ेगा और पृथ्वी काफी अच्छे सीखने वाले हैं. इस स्तर पर जब किसी को प्रदर्शन कर उसे कायम रखना हो और उसके साथ हीलंबे समय तक दुनिया के अगल-अलग हालातों में खेलना हो, तब हालातों में ढलने की क्षमता बहुत मायने रखती है. मुझे लगता है कि पृथ्वी में अलग-अलग हालातों के मुताबिक ढलने की क्षमता है. मेरे लिए पृथ्वी की यह सबसे बड़ी ताकत है.
पृथ्वी शॉ का नाम पिछले करीब आठ बरस से क्रिकेट के गलियारों में सुनाई दे रहा है. हालांकि उसने तीन बरस की उम्र में ही बल्ला थाम लिया था, जब उसका कद उन स्टंप्स से भी छोटा था, जिनके सामने खड़े होकर वह बल्लेबाजी किया करता था. आज यह आलम है कि उसके कद की तुलना दुनिया के बेहतरीन क्रिकेट खिलाड़ियों से की जा रही है.
दस साल पहले ही सचिन कह दिया था…
पृथ्वी को करीब दस बरस पहले सचिन तेंदुलकर ने बल्लेबाजी करते हुए देखा था और आठ बरस के बच्चे का, गेंद को समझने और सही तकनीक के साथ पूरी ताकत से शॉट लगाने का अंदाज उन्हें इतना पसंद आया था कि उन्होंने उसी समय उसके भारत के लिए खेलने की भविष्यवाणी कर दी थी. पृथ्वी के बेहतरीन खेल का ही चमत्कार है कि वह रिजवी स्प्रिंगफील्ड के लिए खेलता है, जो मुंबई की सर्वश्रेष्ठ स्कूल टीम है और वह शहर के प्रसिद्ध एमआईजी क्रिकेट क्लब में क्रिकेट की बारीकियां सीखता है. इस क्लब की प्रतिष्ठा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सचिन तेंदुलकर के पुत्र अर्जुन को भी इसी क्लब में कोचिंग दी जा रही है.
सचिन से तुलना पर यह कहना है शॉ का
शॉ को इस बात का एहसास है कि उनके खेल में कुछ ऐसी बात है कि लोग उनकी तुलना सचिन तेंदुलकर से करते हैं. हाल ही में शॉ ने एक अखबार के साथ मुलाकात में कहा, ‘‘लोग मेरे पास आते हैं और कहते हैं कि उन्हें मुझमें सचिन तेंदुलकर का अक्स नजर आता है. वह क्रिकेट के भगवान से मेरी तुलना करते हैं. मेरे लिए यही ठीक है कि मैं इन बातों पर ध्यान दिए बिना अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान दूं.’’
पिता को बहुत मानते हैं पृथ्वी शॉ
महज चार बरस की उम्र में अपनी मां को खो देने वाले पृथ्वी के जीवन पर उनके पिता का बहुत गहरा असर है. उन्हें एक अच्छा इनसान बनाने के साथ ही एक बेहतरीन क्रिकेट खिलाड़ी बनाने का सपना देखने वाले अपने पिता को पृथ्वी ने चार अक्टूबर को एक बेहतरीन तोहफा दिया जब उन्होंने अपने पहले ही मैच में शतक लगाकर खुद को सचिन तेंदुलकर की श्रेणी में खड़ा कर दिया. दरअसल वह सचिन के बाद टेस्ट क्रिकेट में शतक बनाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी हैं. इसी साल जून में फादर्स डे पर पृथ्वी ने सोशल मीडिया पर अपने पिता को उनपर भरोसा करने के लिए धन्यवाद दिया था.