
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में करीब आधा दशक बिताने के बाद रवींद्र जडेजा ने अपना पहला शतक लगाने में हासिल की। इस भारतीय ऑलराउंडर ने कहा कि नर्वस नाइंटीज पर शांत रहने की वजह से उन्हें इस खास उपलब्धि को हासिल करने में मदद मिली।
जडेजा ने इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट में 86 और 90 रन के स्कोर बनाए थे, लेकिन वह पिछले 37 टेस्ट और 140 वनडे मैचों में कभी भी शतक नहीं लगा सके थे। बिलकुल ठीक समय पर उन्होंने अपने घरेलू मैदान पर यह उपलब्धि हासिल की और इस शतकीय पारी को अपनी दिवंगत मां को समर्पित किया। 
जब वह नर्वस नाइंटीज में थे तो उनके साथ 11वें नंबर के बल्लेबाज मुहम्मद शमी थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अतिरिक्त दबाव महसूस नहीं किया। जडेजा ने कहा, ‘यह बेहद खास है क्योंकि पहले भी में 80 और 90 का आंकड़ा पार कर चुका था, लेकिन उन्हें शतक में नहीं बदल पाया था। आज मैं बिलकुल परेशान नहीं था और कोई खराब शॉट नहीं खेलना चाहता था। मैंने उमेश और शमी से बातें करना जारी रखा और खुद से भी कहा कि मुझे तब तक खेलने की जरूरत है जब तक कि मैं शतक पूरा नहीं कर लेता।
जडेजा ने अपने खास तलवारबाजी के अंदाज में शतक का जश्न मनाया। जडेजा ने वेस्टइंडीज के पारी के दौरान भी अहम भूमिका निभाई। हालांकि, यह एक हास्यपूर्ण घटना साबित हुई, लेकिन यह इस घरेलू हीरो को आसानी से शर्मिदा कर सकती थी।
भारतीय ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने 12वें ओवर में शिमरान हेटमायर को गेंद फेंकी। इस गेंद को उन्होंने मिड विकेट पर खेला। हेटमायर पहले रन के लिए उत्साहित नजर आ रहे थे लेकिन बाद में उनका इरादा बदल गया। लेकिन उनके साथी सुनील एंब्रिस लगातार दौड़ते चले आए। हालांकि, एंब्रिस अपने साथी से पहले बल्लेबाजी छोर पर पहुंच गए।
इस बीच जडेजा ने गेंद पकड़ी और टहलते हुए गेंदबाजी छोर पर आए। सब हैरान थे कि आखिर जडेजा क्या कर रहे हैं। वह गेंद को थ्रो क्यों नहीं कर रहे। खैर, उन्होंने आखिरी लम्हे पर गेंद को विकेटों पर थ्रो कर दिया। बल्लेबाज क्रीज से बाहर था और गिल्लियां बिखर चुकीं थीं।
सवाल यह था कि अगर वह मौका चूक जाते तो क्या होता। खैर, हेटमायर रन आउट हो गए। जडेजा ने कहा, ‘दोनों एक ही छोर पर थे और इस हालात में मैंने नहीं सोचा था कि हेटमायर दूसरे छोर की ओर दौड़ना शुरू कर देंगे। मैं निश्चिंत था और इसलिए मैं गिल्लियां गिराने के लिए चलकर जा रहा था। उनका दौड़ने प्रयास अच्छा था।