हाईकोर्ट में देवघर मामले में लालू यादव की सजा बढ़ाने के लिए याचिका हुई दाखिल…

देवघर कोषागार मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, आरके राणा सहित अन्य लोगों की सजा बढ़ाए जाने की मांग को लेकर सीबीआई ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है।बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा, विद्यासागर निषाद सहित चार लोगों को निचली अदालत द्वारा बरी होने के खिलाफ सीबीआई ने याचिका दाखिल की है।

गौरतलब है कि चारा घोटाले से जुड़े देवघर कोषागार से अवैध निकासी के दोषी बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद को सीबीआई कोर्ट ने साढ़े तीन साल कैद की सजा सुनाते हुए दस लाख का जुर्माना भी लगाया था। जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर उन्हें अतिरिक्त छह माह कैद में रहना होगा। उन पर भादवि की धारा और पीसी एक्ट की धाराओं में पांच-पांच लाख का अलग-अलग जुर्माना लगाया गया था।

सीबीआई के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह की अदालत ने इस मामले के ( आरसी 64 ए/96) के अन्य 15 आरोपियों को भी सजा सुनाई। सभी को 23 दिसंबर को दोषी करार दिया गया था। सभी दोषियों को भादवि की धारा 120 बी, 420, 467, 468, 471, 477 ए और पीसी एक्ट के सेक्शन 13 (2) 13(1) (सी) 9डी) के तहत दोषी मानते हुए सजा सुनाई गई। इन्हें साजिश रचने, धोखाधड़ी करने, फरजी आवंटन तैयार करने, फरजी बिल तैयार करने, सरकारी दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल करने और भ्रष्टाचार करने का दोषी मानते हुए अदालत ने सजा सुनाई। जिन्हें साढ़े तीन साल की सजा सुनाई गई है, उनमें आपूर्तिकर्ताओं को छोड़कर बाकी सभी को दस लाख और सात साल की सजा वालों पर बीस लाख का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माने की राशि जमा नहीं करने वाले साढ़े तीन साल के दोषियों को छह माह और सात साल वालों को अतिरिक्त एक साल जेल में रहना होगा।

अदालत ने इस मामले के दो दोषियों पूर्व सांसद जगदीश शर्मा और आपूर्तिकर्ता त्रिपुरारी मोहन प्रसाद को सात साल कैद और दस लाख का जुर्माना लगाया। जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर इन्हें एक साल अतिरिक्त जेल में रहना होगा।

जानें, क्या है मामला
यह मामला देवघर कोषागार से 89.4 लाख रुपये की अवैध निकासी का है। सीबीआई ने सभी आरोपितों पर फरजी बिल और फरजी आवंटन तैयार कर कोषागार से अवैध निकासी करने के आरोप में 1996 में प्राथमिकी दर्ज की थी।