
बिहार विधानसभा अध्यक्ष विजय चौधरी ने नीति आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि बिहार के साथ इंसाफ नही किया जा रहा है। उन्होंने आयोग के कॉन्सेप्ट पर नाराजगी जताते हुए कहा कि आयोग के कामकाज का तरीका अबतक समझ में नहीं आया है। नीति आयोग बड़ी-बड़ी शब्दावली का प्रयोग कर रहा जबकि उसका काम तो गांव के स्तर पर होता है।

उन्होंने कहा कि पिछड़े जिलों को महत्वाकांक्षी जिला बताने से काम नहीं चलेगा।विजय चौधरी ने फिर से बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की बात दुहराई और कहा कि ये हमारा हक है।
वहीं झारखंड सरकार के मंत्री सरयू राय ने कहा कि वित्त आयोग को स्थायी स्वरुप मिलना चाहिए ताकि वो पिछड़े राज्यों के लिए नई नीति बना सके। उन्होंने कहा कि बंगाल प्रेसिडेंसी में शामिल रहे राज्यों पर विशेष ध्यान देने की जरुरत है।
अपने चार दिवसीय बिहार दौरे पर 15 वें वित्त आयोग की टीम पटना पहुंची है और आयोग के अनुरोध ‘ऐड्रेसिंग द प्रॉब्लम्स ऑफ इंटर-स्टेट एंड इंटर डिस्ट्रिक्ट डिस्पेरिटी ऑफ इंडिया’ विषय को लेकर सेमिनार का आयोजन आद्री की ओर से आयोजित किया गया है।
कार्यक्रम में उपस्थित वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ एन के सिंह ने कहा कि आयोग बिहार की मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगा। उन्होंने कहा कि बिहार से मेरे गहरे ताल्लुकात रहे हैं। मैं बिहार में काम कर चुका हूं। बता दें कि वे बिहार में योजना पर्षद के उपाध्यक्ष के साथ-साथ राज्य सभा के सदस्य रह चुके हैं।
सिंह ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने जो मांग उठायी है वह पूरे बिहार की मांग है। आयोग के समक्ष जो मांग उठायी है वह सही है। लेकिन उनके सामने अब परिस्थितियां बदल गयी हैं। अब वे 15 वें वित्त आयोग के अध्यक्ष हैं। अध्यक्ष बनने से उनके सोच में परिवर्तन तो नहीं हुआ लेकिन क्षमता में परिवर्तन हो गया है।
उन्होंने कहा कि वाकई में बिहार अनेक परेशानियों से जूझ रहा है।नेपाल की बाढ़ से बिहारवासियों को परेशानी झेलनी पड़ती है। आयोग बिहार विधानसभा के अध्यक्ष विजय चौधरी ने जो मांग उठायी है उस पर गहराई से विचार करेगा।
इससे पहले कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विजय चौधरी ने नीति आयोग पर बिहार की उपेक्षा को लेकर निशाना साधा. उन्होंने बिहार के हालात पर चर्चा की और वित्त आयोग से मांग किया की बिहार की परिस्थितियों के मद्देनजर हमारी मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाये. विधानसभा अध्यक्ष ने वित्त आयोग के समक्ष नेपाल से आने वाली प्रलंयकारी बाढ़ से होने वाली बर्बादी पर ध्यान आकृष्ट कराते हुए मांग किया की बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिलना चाहिए.