
उत्तराखंड में चीन सीमा पर सड़कों को बेहतर बनाने की कवायद तेज कर दी गई है। इसी क्रम में सामरिक दृष्टि से संवेदनशील उत्तरकाशी जिले की नेलांग घाटी में सीमा को जोड़ने वाली सड़कों का डामरीकरण का कार्य लगभग पूरा कर लिया गया है। इसमें आइटीबीपी की चौकियों तक जाने वाले संपर्क मार्ग भी शामिल हैं। इतना ही नहीं जाह्नवी नदी पर छह पुलों का निर्माण कार्य भी पूरा हो गया है। इससे सेना के वाहनों को चौकियों तक पहुंचने में काफी कम समय लगेगा।

उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से 125 किलोमीटर दूर नेलांग घाटी में सात दर्रे हैं। सीमा पर स्थित इन दर्रों के पास ही भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल की नौ निगरानी चौकियां हैं। वर्ष 2013 तक उत्तरकाशी से नेलांग घाटी में नागा चौकी तक ही सड़क थी। इसमें भी भैरव घाटी से नागा चौकी तक सड़क कच्ची थी।
सेना व आइटीबीपी के जवानों को नागा चेक पोस्ट से अन्य चौकियों तक पहुंचने के लिए 20 से 40 किलोमीटर की दूरी पैदल नापनी पड़ती थी। दूसरा विकल्प सिर्फ हेलीकॉप्टर ही था। वर्ष 2014 में केंद्र सरकार ने इस इलाके में सड़क निर्माण पर फोकस किया। जून 2017 के बाद इसमें तेजी आई और अंतिम चौकी सुमला, मेंडी, नीला पानी, पीडीए, त्रिपानी, सोनम व जादूंग तक सड़क पहुंची।
बावजूद इसके कच्ची सड़क पर हिचकोले खाते हुए सीमा तक का सफर न केवल थकाने वाला था, बल्कि इसमें समय भी काफी लगता था। अप्रैल 2018 में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने सड़कों का डामरीकरण कार्य शुरू किया। बीआरओ के कमांडर सुनील श्रीवास्तव ने बताया कि केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के सहयोग से डामरीकरण का कार्य लगभग पूरा हो गया है। अब सिर्फ भैरवघाटी से नेलांग के बीच करीब 15 किलोमीटर सड़क का डामरीकरण होना बाकी है। इसे भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा।