
लॉ स्टूडेंट से गन प्वाइंट पर दुष्कर्म करने के आरोपित एआइजी (इंटेलीजेंस) रणधीर सिंह उप्पल की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने छापेमारी शुरू कर दी है। पुलिस ने अमृतसर के मीरां कोट स्थित आरोपित की कोठी और चंडीगढ़ में उसके आवास स्थान पर छापेमारी की, लेकिन वह नहीं मिला। परिवार के सदस्य भी पुलिस को कुछ बताने को तैयार नहीं हैं।
उधर, मामला दर्ज होने की सूचना मिलने के बाद से ही रणधीर सिंह ने अपने सभी मोबाइल नंबरों को बंद कर दिया है। पुलिस को आशंका है कि कानून की गिरफ्त से बचने के लिए वह विदेश में रहने वाले अपने रिश्तेदारों के पास भाग सकता है। फिलहाल अमृतसर पुलिस ने एआइजी रणधीर के खिलाफ एलओसी (लुक आउट कार्नर) जारी करवा दिया है।
पुलिस ने पीड़ित युवती को फोन पर संदेश भेजा है कि उसकी डॉक्टरी जांच करवाई जानी है, लेकिन शनिवार को युवती कैंटोनमेंट थाने नहीं पहुंची। पुलिस ने बताया कि महिला के आने पर उसकी डॉक्टरी जांच करवाकर एफआइआर के साथ अटैच कर दी जाएगी। एडीसीपी लखबीर सिंह ने बताया कि पुलिस ने देश के सभी हवाई अड्डों को एलओसी के जरिए एआइजी के बारे में जानकारी दे दी है। अब आरोपित किसी भी कीमत पर देश नहीं छोड़ पाएगा।
एफआइआर में परमिंदर और जसकरण का भी है नाम
पुलिस ने दुष्कर्म और अन्य आपराधिक धाराओं के तहत एआइजी रणधीर सिंह उप्पल के खिलाफ ही केस दर्ज नहीं किया है। पता चला है कि एफआइआर में जसकरण सिंह और परमिंदर सिंह के नाम भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि उक्त दोनों आरोपित लॉ स्टूडेंट को चंडीगढ़ के होटल और अमृतसर के खाली मकान में लेकर पहुंचते थे। फिलहाल यह पता नहीं चल पाया है कि महिला को एआइजी के पास छोडऩे वाले उक्त दोनों पुलिस कर्मी (एआइजी के गनमैन) हैं या फिर दोस्त व सगे संबंधी।
क्राइम डायरी कर दी सेंसर
पुलिस विभाग आज भी एआइजी को बचाने के लिए एड़ी चोटी का यत्न कर रहा है। राजनीतिक दबाव के चलते पुलिस ने आननफानन में एआइजी पर दुष्कर्म के आरोप में केस तो दर्ज कर लिया, लेकिन शनिवार को मीडिया को जारी की जाने वाली क्राइम डायरी (अपराध डायरी) को सेंसर कर दिया। क्राइम डायरी में एआइजी के खिलाफ दर्ज किया गया केस ही हटा दिया गया।
क्या है मामला
17 सितंबर की रात लॉ स्टूडेंट ने कैंटोनमेंट थाने पहुंचकर एआइजी के खिलाफ शिकायत दी थी। थाना प्रभारी संजीव कुमार ने शिकायत तो ले ली, लेकिन उस पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं की। थाने से पल-पल की जानकारी एआइजी के पास पहुंच रही थी। जब पुलिस ने कार्रवाई नहीं की तो 18 सितंबर की दोपहर महिला स्वयं पुलिस कमिश्नर के दरबार में इंसाफ के लिए पहुंच गई। सीपी ने उसकी शिकायत सीधे पुलिस हेडक्वार्टर भेज दी। डीजी के आदेश पर आइजी विभु राज ने मामले की जांच की और आरोप सही मिलने पर पुलिस को एफआइआर दर्ज करने के लिए लिख दिया।