
आने वाले आम चुनावों में राफेल सौदा क्या गुल खिलाएगा यह तो पता नहीं लेकिन मौजूदा दौर में राफेल सौदे को लेकर पक्ष और विपक्ष दोनों में ही घमासान जारी है। मंगलवार को लगाए गए भाजपा के आरोपों का जवाब देते हुए आज राबर्ट वाड्रा ने भी राफेल सौदे पर मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा है। वॉड्रा ने कहा है कि, राफेल सौदे पर मेरे खिलाफ सारे आरोप गलत और बेबुनियाद हैं। राफेल सौदे की सच्चाई के बारे में मुझसे नहीं बल्कि पीएम से पूछा जाना चाहिए। मौजूदा दौर में सरकार अपनी असफलताओं को छुपाने के लिए राफेल मुद्दे से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।
वाड्रा ने आगे कहा कि, पहले मुझे हैरानी होती थी मगर अब ये साफ है की जब भी उनको घेरा जाता था या रुपया गिरने का मसला हो, तेल की कीमतों का मामला हो तो बीजेपी मेरे नाम को इस्तेमाल करती थी लेकिन बीजेपी द्वारा राफेल पर देश को लूटने का खुलासा होने पर सारी चीजें साफ हो गई हैं।
इसके पहले भाजपा ने मंगलवार को राफेल सौदे के रद्द होने के लिए गांधी परिवार को जिम्मेदार ठहराया था। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा था कि यूपीए सरकार ने यह सौदा इसलिए रद्द कर दिया था क्योंकि वाड्रा के दोस्त की कंपनी को बिचौलिया नहीं बनाया गया था। यूपीए सरकार चाहती थी कि यह करार राबर्ट वाड्रा के जरिये हो, ताकि उन्हें इसका फायदा मिल सके। आज भी इसकी कोशिश जारी है। वाड्रा के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं और उनका जेल जाना तय है।
पात्रा ने आरोप लगाया है कि वाड्रा के दोस्त संजय भंडारी ने 2008 में एक लाख की पूंजी से ऑफसेट कंपनी बनाई और जो बाद में वाड्रा की मदद से हजारों करोड़ की कंपनी बनी। संबित ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के आने के बाद 2014 में दलाली करने वाली कंपनी पर कार्रवाई हुई।
2016 में भंडारी के घर और दफ्तर पर छापे पड़े, जहां राफेल खरीद से संबधित गोपनीय दस्तावेज मिले। वाड्रा के अभिन्न मित्र संजय भंडारी के घर यह कागज कैसे पहुंचे इसका जवाब राहुल गांधी को देना चाहिए। पात्रा ने सबूत के तौर पर कई ईमेल भी दिखाये जिसमें लंदन में संजय भंडारी के रिश्तेदार सुमित चढ्डा द्वारा राबर्ट वाड्रा के लिए 19 करोड़ के घर की जानकारी है। संबित पात्रा ने दावा किया कि 2009 में ये घर खरीदा गया था।