
सरना धर्म व संताली भाषा को संवैधानिक स्वीकृति समेत विभिन्न मांगों को लेकर आदिवासी संगठनों के रेल रोको आंदोलन का सोमवार को ट्रेनों पर व्यापक असर पड़ा। दक्षिण पूर्व रेलवे की कई ट्रेनें जहां-तहां खड़ी हो गई, कई को रद भी करना पड़ा। आदिवासियों की हड़ताल सोमवार देर रात करीब तीन बजे खत्म हो गई। मंगलवार को भी कई ट्रेनों का परिचालन रद रहा। इस कारण यात्रियों का बुरा हाल है। झारखंड में हावड़ा-मुंबई रूट पर दर्जनों ट्रेनें और हजारों यात्री प्रभावित हैं। संथाल लोग अपनी मांगों को लेकर ट्रैक पर बैठ गए थे। मंगलवार तड़के साढ़े तीन बजे प्रशासन ने उन्हें हटा तो दिया लेकिन इससे इस सेक्शन पर रेल परिवहन बुरी तरह चरमराया। अपनी मांगों को लेकर आदिवासी संगठनों ने सोमवार से रेल ट्रैक जाम कर रखा था। 
जानकारी के मुताबिक, भारत जकात माझी परगना महल की ओर से मांगों के समर्थन में सोमवार को देर शाम तक बंद समर्थकों के रेल पटरी पर बैठने के कारण ट्रेनों का परिचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ। कई ट्रेनों में पानी खत्म होने और एसी बंद होने से यात्रियों को परेशानी हुई। हालांकि दोपहर में एक बार परिचालन की कोशिश हुई, लेकिन उसे रोकना पड़ा। बार-बार यात्रियों द्वारा परिचालन संबंधी जानकारी लेने और हंगामा किए जाने से रेल कर्मचारी भी परेशान रहे। टाटानगर स्टेशन के पूछताछ केंद्र, परिचालन विभाग व स्टेशन निदेशक के कार्यालय में यात्रियों ने जमकर हंगामा किया।
हंगामे से परेशान रेलकर्मी कई बार अपने कार्यालय से अंदर-बाहर होते रहे। अहमदाबाद-हावड़ा एक्सप्रेस सुबह से ही टाटानगर स्टेशन में रुकी रही। हावड़ा-शिवाजी महाराज टर्मिनल ट्रेन हावड़ा स्टेशन में रुकी रही। इस्पात एक्सप्रेस खड़गपुर में रुकी रही। उधर, मुंबई-हावड़ा गीतांजलि एक्सप्रेस जैसे ही घाटशिला स्टेशन पहुंची, आंदोलनकारियों ने उसे रोक दिया। यहां यह ट्रेन घंटों रुकी रही, जिसके कारण ट्रेन के एक कोच के एसी ने काम करना बंद कर दिया। जबकि स्लीपर कोच का पानी खत्म होने के बाद बाद यात्रियों ने जमकर हंगामा किया।