दुनिया का एकमात्र मंदिर जहां शाम होते ही लग जाते है ताले, वजह जानकर रह जायेंगे आप हैरान !

भारत देश में कई राज्यों में सैकड़ो अनगिनत किले और महल है जिनके बारे में घटनाये प्रचलित है। आज हम आपको एक ऐसे ही मंदिर के बारे में बताने जा रहे है जिसके बारे एक घटना प्रचलित है। जी हां राजस्थान के बाड़मेर से 30 किलोमीटर एक छोटा सा गांव है किराड़ू। इस गांव में एक मंदिर है। इस गांव का नाम इस मंदिर के नाम पर ही पड़ा है। कहते हैं कि 11वीं शताब्दी में किराड़ू परमार वंश की राजधानी हुआ करता थी। लेकिन आज ये यहां चारों सन्नाटा पसर हुआ है। जो भी शख्स इस जगह के बारे में जानता है उसके चेहरे पर किराड़ू के नाम दहशत पसर जाती है। किवदंतियों में ऐसा उल्लेख है कि बाड़मेर का यह एतिहासिक मंदिर श्रापित है।भारत देश में कई राज्यों में सैकड़ो अनगिनत किले और महल है जिनके बारे में घटनाये प्रचलित है। आज हम आपको एक ऐसे ही मंदिर के बारे में बताने जा रहे है जिसके बारे एक घटना प्रचलित है। जी हां राजस्थान के बाड़मेर से 30 किलोमीटर एक छोटा सा गांव है किराड़ू। इस गांव में एक मंदिर है। इस गांव का नाम इस मंदिर के नाम पर ही पड़ा है। कहते हैं कि 11वीं शताब्दी में किराड़ू परमार वंश की राजधानी हुआ करता थी। लेकिन आज ये यहां चारों सन्नाटा पसर हुआ है। जो भी शख्स इस जगह के बारे में जानता है उसके चेहरे पर किराड़ू के नाम दहशत पसर जाती है। किवदंतियों में ऐसा उल्लेख है कि बाड़मेर का यह एतिहासिक मंदिर श्रापित है।  किराड़ू के बारे में जो किस्से-कहानियां मशहूर हैं उन्हें जानने के बाद लोग हैरत में पड़ जाते हैं। इस मंदिर के आस-पास रहने वाले लोग इस मंदिर से जुड़े अपशकुनों और श्रापों के बारे बताते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक मंदिर के बाहर एक बड़ा सा पत्थर है दरअसल यह एक कुम्हारिन है जोकि एक ऋषि के श्राप के कारण पत्थर बन गई है।   इस मंदिर में शाम होते ही सन्नाटा पसर जाता है। सारी वास्तुकलाओं पर ताला लगा दिया जाता है। जैसे ही सूरज ढलता है इंसानी शरीर को इसस दूर कर दिया जाता है। कहते हैं जो भी शाम के बाद यहां रुकता है वो पत्थर बन जाता है। लोगों का कहना है कि यहां मौजूद सभी पत्थर किसी जमाने में इंसान हुआ करते थे। शायद इसी डर से आज तक किसी ने कानूनी कायदों को चुनौती देने की जुर्रत नहीं की।   19 शताब्दी में यहां भूकंप आया था जिसकी वजह से इस मंदिर को बहुत नुकसान पहुंचा। कई सालों तक वीरान रहने के कारण इस मंदिर का रख-रखाव नहीं हो पाया था। किराड़ू में कुल 5 मंदिर हैं, जिनमें से आज सिर्फ विष्णु और सोमेश्वर का मंदिर ही सही हालत में हैं। यहां मौजूद सभी मंदिरों में से सोमेश्वर मंदिर सबसे बड़ा है।

किराड़ू के बारे में जो किस्से-कहानियां मशहूर हैं उन्हें जानने के बाद लोग हैरत में पड़ जाते हैं। इस मंदिर के आस-पास रहने वाले लोग इस मंदिर से जुड़े अपशकुनों और श्रापों के बारे बताते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक मंदिर के बाहर एक बड़ा सा पत्थर है दरअसल यह एक कुम्हारिन है जोकि एक ऋषि के श्राप के कारण पत्थर बन गई है। 

इस मंदिर में शाम होते ही सन्नाटा पसर जाता है। सारी वास्तुकलाओं पर ताला लगा दिया जाता है। जैसे ही सूरज ढलता है इंसानी शरीर को इसस दूर कर दिया जाता है। कहते हैं जो भी शाम के बाद यहां रुकता है वो पत्थर बन जाता है। लोगों का कहना है कि यहां मौजूद सभी पत्थर किसी जमाने में इंसान हुआ करते थे। शायद इसी डर से आज तक किसी ने कानूनी कायदों को चुनौती देने की जुर्रत नहीं की। 
19 शताब्दी में यहां भूकंप आया था जिसकी वजह से इस मंदिर को बहुत नुकसान पहुंचा। कई सालों तक वीरान रहने के कारण इस मंदिर का रख-रखाव नहीं हो पाया था। किराड़ू में कुल 5 मंदिर हैं, जिनमें से आज सिर्फ विष्णु और सोमेश्वर का मंदिर ही सही हालत में हैं। यहां मौजूद सभी मंदिरों में से सोमेश्वर मंदिर सबसे बड़ा है।