
जलवायु परिवर्तन से संबद्ध एक वरिष्ठ वार्ताकार ने शुक्रवार को चेतावनी दी कि फिजी और मालदीव जैसे द्वीप देश समुद्र के बढ़ते स्तर के कारण विनाश के कगार पर पहुंच गये हैं. एलायंस ऑफ स्मॉल आइलैंड स्टेट्स (एओएसआईएस) के प्रमुख वार्ताकार अमजद अब्दुल्ला ने चेतावनी दी है कि धरती के गर्म हो रही है, जमीन और बुनियादी ढांचे फैलते समुद्रों के पेट में समा रहे हैं और इस सबके बीच कई द्वीपों पर भयंकर बाढ़ एवं चक्रवातीय तूफानों का खतरा मंडरा रहा है. 
जहां जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते में प्राण फूंकने पर केंद्रित बैंकाक की अहम वार्ता में दुनियाभर के विशेषज्ञ चर्चा में लगे हैं वहीं अब्दुल्ला ने कहा कि कुछ देशों के मामले में पहले ही समय निकल चुका है उन्होंने इस छह दिवसीय सम्मेलन के मौके पर कहा, ‘‘हमारे द्वीपों पर खतरा मंडरा रहा है.
हालांकि हम अपने सीमित संसाधनों से अपने बूते से भी बाहर जाकर प्रयास कर रहे हैं. ’’ उन्होंने कहा, ‘‘दरअसल हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय से जो कह रहे हैं, वह यह है कि जलवायु परिवर्तन के मुद्दे का समाधान करने की दृष्टि से हमारे पास पर्याप्त वित्तीय, प्रौद्योगिकी या मानवीय क्षमता नहीं है. हमें अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरुरत है ताकि हम अपने द्वीपों को बचा सकें. ’’
2015 के पेरिस समझौते का लक्ष्य वैश्विक तापमान में वृद्धि को दो डिग्री सेल्सियस के बीच सीमित करना और यदि संभव हो तो उसे 1.5 डिग्री से नीचे ही रखना है.इस समझौते को हस्ताक्षरकर्ता देशों द्वारा दिसंबर तक अंगीकार किया जाना है