अब लखनऊ पीजीआई में जल्द शुरू होगी रोबोटिक सर्जरी

लखनऊ के संजय गांधी पीजीआई में अब रोबोटिक सर्जरी शुरू करने की तैयारी है। रोबोटिक सर्जरी प्रदेश में पहली बार होगी। इसके लिए नया मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर तैयार किया जा रहा है। निदेशक डॉ. राकेश कपूर के मुताबिक करीब तीन माह में रोबोटिक सर्जरी शुरू हो जाएगी। शुरुआत यूरोलॉजी विभाग से होगी। हालांकि शुरुआती दिनों में छोटे ऑपरेशन किए जाएंगे, बाद में कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी और कैंसर सहित अन्य विभागों में भी रोबोटिक सर्जरी हो सकेंगी।सजीपीजीआई ने इसके लिए बैंक से कर्ज भी लिया है। करीब 473 करोड़ के लोन में करीब सौ करोड़ रोबोटिक सर्जरी पर खर्च करने की तैयारी है। इसमें 30 करोड़ रुपये का सिर्फ रोबोट ही आएगा। संस्थान में बने एमआरआई कक्ष के ऊपर रोबोटिक सर्जरी के लिए नई तरह का मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर तैयार कराया गया है।

ये मशीन क्यों खास
जर्मनी में बनी दा विंसी सर्जिकल रोबोटिक मशीन में हाई डेफिनिशन थ्री-डी कैमरा लगा होता है। इससे अंदरूनी अंगों की सटीकता से जानकारी मिलती है। इसकी मदद से छोटे उपकरण शरीर में प्रवेश कराए जा सकते हैं, जो इंसानों के हाथ से कहीं ज्यादा घूमते हैं।

ऐसे करता है काम
यह सिस्टम एक तरह से यह कंप्यूटराइज्ड सिस्टम से कंट्रोल होता है। सर्जन हाथ से ऑपरेशन करने के बजाय कई रोबोटिक आर्म के सहारे सर्जरी करता है। इन रोबोटिक हाथों को कंसोल के जरिए सर्जन गाइड और कंट्रोल करता है।

सर्जन बनाम रोबोटिक सर्जरी
एक सर्जन जहां 10 मिलीमीटर तक सटीकता के साथ काम कर सकते हैं, वहीं एक रोबोट एक मिमी की सटीकता के साथ किसी भी प्रक्रिया को सुरक्षित तरीके से पूरा कर सकता है।

कम समय में अस्पताल से छुट्टी
चीरे बहुत छोटे लगते हैं। इससे मरीज जल्द रिकवर होता है। सामान्य सर्जरी में मरीज को दो घंटे बाद ही छुट्टी मिल जाती है। मरीज को अस्पताल में कम समय रहना पड़ता है।

पर खर्च ज्यादा
यह मानवीय सर्जरी से करीब 50 हजार से दो लाख रुपये तक महंगी पड़ती है।
निदेशक डॉ. राकेश कपूर ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी का संस्थान को भी फायदा होता है। इसमें अस्पताल प्रशासन को कम स्टाफ लगाना पड़ता है। यह हृदय शल्य चिकित्सा, कोलोरेक्टल सर्जरी, जनरल सर्जरी, गाइनेकोलॉजिकल सर्जरी कर सकती है। उदाहरण के तौर पर ओपन हार्ट सर्जरी में में 10 से 12 इंच तक का चीरा लगता है। इसके बाद सीने की हड्डी को अलग करने के बाद पसलियों के अंदर ऑपरेशन किया जाता है। इसके बाद रोगी को हार्ट मशीन पर रखकर ऑपरेशन किया जाता है, लेकिन इसमें सिर्फ एक चीरे से काम चल जाता है।

पहले से ज्यादा हो सकेंगे ऑपरेशन
रोबोटिक सर्जरी शुरू होने से ज्यादा से ज्यादा ऑपरेशन हो सकेंगे। मरीजों के बढ़ते भार को देखते हुए यह जरूरी हो गया है। यह संस्थान का ड्रीम प्रोजेक्ट है। इसके लिए सरकारी तौर पर नियमानुसार सभी जरूरी अनुमति ली जा चुकी है। इसे शुरू करने के लिए चिकित्सा विशेषज्ञ भी तैयार हैं।

देश में बढ़ रही रोबोटिक सर्जरी
डॉ. राकेश कपूर ने बताया कि अमेरिका में रोबोटिक ऑपरेशन में तमाम नए-नए प्रयोग हुए हैं। भारत में रोबोट का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। एक रिपोर्ट से पता चला है कि यहां हर माह करीब 800 सर्जरी इस तकनीक से हो रही है। भारत रोबोट की बिक्री और सर्जरी के मामले में दुनिया का दूसरा बड़ा बाजार बनने की दौड़ में शामिल है। अभी भारत में 50 से ज्यादा सर्जिकल रोबोट हैं, जिसमें 300 से ज्यादा ट्रेंड रोबोट सर्जन हैं। एसजीपीजीआई में रोबोटिक सर्जरी प्रशिक्षण के लिहाज से भी जरूरी है। यहां ट्रेंड होने वाले सर्जन पूरे प्रदेश में काम करेंगे। रोबोटिक सर्जरी के मामले अमेरिका पहले पायदान पर है। इसी तरह जर्मनी और फ्रांस सहित यूरोप के अन्य देशों मेें भी यह प्रणाली लोकप्रिय है। देश में एम्स नई दिल्ली, पीजीआई चंडीगढ़, एम्स ऋषिकेश सहित तमाम निजी अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी शुरू हो गई है।