बिहार में भीड़ की क्रूरता पर गंभीर हुई सरकार, पुलिस को कहा- ये करो वरना…

पटना। राज्य में ‘मॉब लिंचिंग’ रोकने के लिए गृह विभाग ने सभी जिलों के एसएसपी व एसपी को नोडल पदाधिकारी का दायित्व सौंपा है। शुक्रवार को गृह विभाग के प्रधान सचिव आमिर सुबहानी और डीजीपी केएस द्विवेदी ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों व एसएसपी/एसपी के साथ वीडियो कान्फ्रेंसिंग कर आवश्यक निर्देश दिए।

निर्देश में कहा गया कि ये अधिकारी अपने-अपने जिलों में मॉब लिंचिंग वाले इलाकों की पहचान करें। उन्होंने इस काम में लापरवाही बरतने वाले  अधिकारियों को चेतावनी भी दी। दरअसल, विगत 17 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय के तीन न्यायाधीशों की खंडपीठ ने ‘मॉब लिंचिंग’ (भीड़ द्वारा किसी की पीट-पीटकर हत्या करने) को लेकर राज्यों को दिशा निर्देश दिए थे। इसी सिलसिले में गृह सचिव व डीजीपी, डीएम व एसपी को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए यह निर्देश दे रहे थे। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने सभी डीएम व एसपी को साफ शब्दों में कहा कि भीड़तंत्र को कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

उन्होंने डीएम व एसपी को अपने-अपने जिलों में पिछले पांच वर्षों में मॉब लिंचिंग की घटनाओं के आंकड़े एकत्रित करने का भी निर्देश दिया। साथ ही ऐसे मामलों में तत्काल मुकदमा दर्ज करने तथा ससमय मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ चार्जशीट दायर करने के भी निर्देश दिए हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए उनका स्पीडी ट्रायल कराया जाए। गृह सचिव व डीजीपी ने मॉब लिंचिंग के मामलों में लापरवाह पुलिस पदाधिकारियों व कर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई करने को कहा है। राज्य के अपर पुलिस महानिदेशक (मुख्यालय) संजीव कुमार सिंघल ने बताया कि मॉब लिंचिंग के दायरे में केवल वही घटनाएं आती हैं जिसमें किसी भीड़ ने किसी आपराधिक वारदात के आरोपित की पीट-पीटकर हत्या कर दी हो। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भीड़ द्वारा उपद्रव की घटनाएं ‘मॉब लिंचिंगÓ की श्रेणी में नहीं आती हैं।