बुरे फंसे सिद्धू, शहीद परमजीत का परिवार बोला- शहीद सैनिकों के कटे सिर ले आएं वहां से

चंडीगढ़। पंजाब के मंत्री और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू का इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने पर पंजाब में माहौल और राजनीति गर्मा गई है। सिद्धू ने पाकिस्‍तान में भले ही खुद को ‘शांतिदूत’ के रूप में पेश करने की कोशिश की है, विरोधी उनके इस समारोह में शामिल होने पर तीखे वार कर रहे हैं। पाकिस्‍तानी सैनिकों की बबर्रता के शिकार हुए सैनिक शहीद परमजीत सिंह के परिवार ने सिद्धू से तीखे सवाल पूछे हैं। शहीद परमजीत के परिजनों ने कहा है सिद्धू पाकिस्‍तानी सेना के प्रधान बाजवा से पाक सैनिकों द्वारा शहीद जवानों के काटे गए सिर ही मांग लाएं। अगर सिर नहीं ला सकते ताे वीर जवानों की पगड़ी ही ले आएं।

सिद्धू के पाक दौरे पर कांग्रेस व भाजपा में जंग, गुरु खुद को बता रहे ‘शांतिदूत’

दूसरी ओर, भाजपा ने राष्‍ट्रीय शोक के समय इस तरह पाकिस्‍तान जाने के लिए सिद्धू पर हमला किया है। पार्टी ने उनके पाकिस्‍तानी सेना के प्रधान से गले मिलने के लिए सवाल उठाया है। भाजपा ने इसे शहीद सैनिकों का अपमान करार दिया है। दूसरी ओर, कांग्रेस ने सिद्धू का खुलकर समर्थन किया है और उनके इमरान के शपथ ग्रहण समारोह में जाने को बहुत अच्‍छा कदम बताया है। पाक जेल में मारे गए सरबजीत सिंह की बहन दलबीर कौर ने भी सिद्धू पर निशाना साधा है। सिद्धू आज दोपहर बाद पाकिस्‍तान से लौटेंगे। वह अटारी बॉर्डर होकर आएंगे।

इमरान खान के शपथ ग्रहण समरोह में पाक सेना प्रमुख से गले मिलने पर उठे गंभीर सवाल

पाकिस्तान के आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा से गले मिलने पर तरनतारन के शहीद परमजीत सिंह का परिवार  सिद्धू से काफी खफा है। शहीद की पत्नी परमजीत कौर ने इसे शहीदों का अपमान बताते हुए कहा- सिद्धू साब, जफ्फी पाउण तों पहलां शहीद दे सिर दा वी पूछ लैंदे.. (सिद्धू साहब, जफ्फी डालने से पहले शहीद के सिर के बारे में पूछ लेते)। बता दें कि पहली मई 2017 को जम्मू-कश्मीर की कृष्णा घाटी में सिख रेजीमेंट में नायब सूबेदार परमजीत पाकिस्तान की बॉर्डर एक्शन टीम (बैट) की गोलाबारी में शहीद हो गए थे। बैट जवान बाउनका सिर काट ले गए थे।

शहीद परमजीत के भाई रणजीत सिंह ने कहा कि भी सिद्धू पर कड़ा हमला किया। उन्‍होंने कहा कि परमजीत की शहादत के बाद सिद्धू दिलासा देने घर आए थे तो पाकिस्‍तान को दुश्‍मन देश बताया था और उसके टुकड़े-टुकड़े करने की बात की थी। अब उसी सिद्धू का पाकिस्‍तान दोस्‍त हो गया है। रणजीत ने कहा, पाक आर्मी चीफ से गले मिलते वक्‍त सिद्धू कम से कम उनसे यह पूछ लेेते कि हमारे सैनिकों के कटे सिर कहां हैं। सिद्धू साहब वे कटे सिर ले आते तो बड़ा एहसान होता। सिर नहीं ला सकते तो उनकी पगड़ी की ले आते।

तरनतारन के गांव वेईपुई में शहीद परमजीत सिंह का परिवार शनिवार को टीवी देख रहा था। इसी दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचे सिद्धू द्वारा वहां के आर्मी चीफ से जफ्फी पाने का पता चला। परमजीत कौर ने कहा कि शहादत के बाद उनके पति का बिना सिर वाला शव जब अंतिम संस्कार के लिए लाया गया था तो फौज के अधिकारियों ने बदला लेने का वादा किया था। 

आज भारत लौटेंगे नवजोत सिंह सिद्धू, अटारी बॉर्डर से होकर आएंगे

उधर, भारत खासकर पंजाब में अपने दौरे काे लेकर मचे बवाल के बारे में पाकिस्‍तान में सिद्धू को भी अहसास है। यही कारण है कि उन्‍होंने इस्‍लामााद में इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होेने के बाद अपने दौरे को लेकर सफाई दी। सिद्धू ने कहा, मैें मोहब्‍बत का पैगाम लेकर पाकिस्‍तान आया हूं। हिंदुस्‍तान से जितनी मोहब्‍बत लेकर यहां (पाकिस्‍तान) अाया था उससे 100 गुनी लेकर जा रहा हूं। जो वापस आया है वह सूद सहित है।’

सिद्धू बोले- मुझे उम्‍मीद, हमारी सरकार एक कदम बढ़ेगी तो पाक के लोग दो कदम आगे आएंगे

सिद्धू बोले, यह मेरी ड्यूटी है कि वापस जाकर अपनी सरकार से कदम आगे बढ़ाने को कहूं। मुझे उम्‍मीद है कि यदि हम एक कदम आगे बढ़ाएंगे तो यहां (पाकिस्‍तान) के लोग दो कदम आगे बढ़ेंगे। जनरल बाजवा साहब ने मुझे गले से लगाया अौर बोले हम शांति चाहते हैं। जनरल बाजवा सुबह मेरे पास आए और बोले कि हम गुरु नानक देव के 550वें प्रकटोत्‍सव पर करतारपुर मार्ग खोलने के बारे में विचार कर रहे हैं। सिद्धू ने कहा, हम कब तक लाल सागर (खून खराबा) में तैरेंगे। इसे छोड़ कर नीले सागर (शां‍ति व सद्भाव ) चलो तैरते हैं। यह मेरा सपना है।

भाजपा नेता बोले, सेना प्रमुख के साथ गले मिल सिद्धू ने करवाई भारत की फजीहत

दूसरी ओर, पंजाब भाजपा ने सिद्धू के पाकिस्तान में इमरान खान के शपथ समारोह में वहां के सेना प्रमुख के साथ गले मिलने को लेकर उन पर तीखा हमला किया है। भाजपा नेताओं ने कहा कि सिद्धू गुलाम कश्‍मीर (पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर के हिस्‍से) के राष्ट्रपति के साथ भी बैठे। एेसा कर उन्‍हाेंने भारत की फजीहत कराई है। पार्टी ने इस पर सख्त एतराज जताते हुए कांग्रेस से इसका जवाब मांगा है।

भाजपा के पूर्व प्रधान कमल शर्मा ने कहा कि नवजोत सिंह सिद्धू केवल मीडिया में बने रहना चाहते हैं और इस मामले में वह यह भी नहीं देखते कि जिससे गले मिलकर वे मीडिया की सुर्खियां बटोर रहे हैं वह कौन है और उसका भारत के प्रति नजरिया क्या है? कमल शर्मा ने कहा कि सिद्धू के पाकिस्तान के सेना  प्रमुख से गले मिलने और उनके साथ हंसी मजाक करने को सही नहीं है।

कमल शर्मा ने कहा कि राजन‍ीतिक स्‍तर पर किसी से मिलने में कोई बुराई नहीं है, बेशक वह आपका दुश्मन ही क्यों न हो लेकिन बड़ा सवाल है कि मिलने का तरीका क्या है? एक तरफ सिद्धू कह रहे हैं कि अटल जी उनके राजनीतिक गुरु और आदर्श थे और दूसरी ओर वह उनके अंतिम संस्कार को छोड़कर इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में खुशियां मना रहे हैं, ठहाके लगा रहे हैं। इस समय जब देश पूरा गमगीन माहौल में है, सिद्धू का इस तरह करना सही नहीं लगता। मुझे लगता है कि कांग्रेस को इसका जवाब देना चाहिए।

सिद्धू ने देशवासियों व सैनिकों का अपमान : तरुण चुग

 भाजपा के राष्‍ट्रीय सचिव तरूण चुग ने कहा कि नवजोत सिंह सिद्धू का पाकिस्‍तान सेना के प्रमुख गले मिलना 125 करोड़ देशवासियों और सैनिकों व उनके परिवारों का अपमान है। यह शहीद हो रहे सैनिकों के जख्मों पर नमक छिडकने जैसा है। सिद्धू ने गुलाम कश्मीर के राष्ट्रपति के साथ बैठ कर भारतीय संसद द्वारा पास किए गए उस प्रस्ताव का उलंघन किया है जिसमें पाक्स्तिानी कब्जे वाले कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा माना गया है। उन्होंने कहा कि पहले भी कांग्रेस हाईकमान ने मणिशंकर अय्यर, सलमान खुर्शीद जैसे नेताओं को पाकिस्तान भेजकर ‘मोदी सरकार’ से छुटकारा दिलाने के लिये मदद मांगी थी।

सुनील जाखड़ ने सिद्धू का किया बचाव, कहा- उनका इमरान के शपथ में जाना सराहनीय

उधर, कांग्रेस के पंजाब प्रधान सुनील जाखड़ ने नवजोत सिंह सिद्धू के इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में जाने की सराहना की है। उन्होंने कहा कि जो लोग इसकी आलोचना कर रहे हैं उन्हें मालूम होना चाहिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने शपथ समारोह में नवाज शरीफ को न्यौता देकर बुलाया था। सिद्धू तो फिर भी केंद्र सरकार से अनुमति लेकर पाकिस्तान गए हैं लेकिन नरेंद्र मोदी तो बिन बुलाए मेहमान की तरह नवाज शरीफ के यहां चले गए थे। तब क्या दोनों देशों के बीच माहौल शांत था?

उन्होंने कहा कि पिछले चार सालों में जितनी घुसपैठ हुई है या हमारे जवान मारे गए हैं इतने तो इतिहास में कभी नहीं मारे गए। जाखड़ ने कहा कि आज भाजपा नेताआें को नई-नई बातें सूझ रही हैं, लेकिन क्या उन्हें यह याद नहीं कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी बस लेकर लाहौर गए थे। उसके बाद क्या हुआ कारगिल का युद्ध जिसमें 800 जवान शहीद हो गए।

जाखड़ ने कहा, मुझे लगता है कि हमें नवजोत सिंह सिद्धू की सराहना करनी चाहिए कि वह अपने दोस्त के शपथ समारोह में गए हैं। अब यह इमरान खान पर निर्भर करता है कि वह इस दोस्ती को किस तरह निभाते हैं। अब यह इमरान खान को साबित करना है कि वह सेना के कठपुतली प्रधानमंत्री नहीं हैं। यदि दोनों देशों के बीच बंद पड़ी वार्ता फिर से शुरू हो जाती है तो इससे बड़ी बात क्या होगी? जाखड़ ने कहा कि हमें सिद्धू के वहां जाने की भावना को समझना चाहिए न कि इस पर राजनीति करनी चाहिए।

सरबजीत सिंह की बहन दलबीर कौर ने भी सिद्धू पर साधा निशाना

 दूसरी ओर, पाकि‍स्‍तानी जेल में मारे गए सरबजीत सिंह की बहन दलबीर कौर ने भी नवजोत सिंह सिद्धू पर निशाना साधा। दलबीर कौर ने कहा कि सिद्धू ने पाक में शेरो शायरी में कहा कि पाकिस्तान जीवे। दलबीर ने सिद्धू से पूछा उन्होंने तो पाकिस्तान के जिंदा रहने की दुआ कर दी, लेकिन क्या कभी किसी पाकिस्तानी ने भारत की धरती पर आकर जीवे हिंदुस्तान कहा है।

दलबीर कौर ने कहा कि नवजोत सिंह सिद्धू दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के अंतिम संस्कार में जाने के बजाय पाकिस्तान गए। जिस शख्सियत (अटल जी) की बदौलत सिद्धू को भाजपा की सदस्यता मिली और वह लोकसभा सदस्य बने उन्हें सिद्धू ने भुला दिया। वह इमरान खान के न्यौते पर पाकिस्तान गए और वहां खुद को शांतिदूत बता रहे हैं। वह यह भूल रहे हैं उन्हें ने केंद्र सरकार और न राज्य सरकार ने दूत बनाकर भेजा है।

सिद्धू का विवादों से रहा है पुराना नाता

– नवजोत सिंह सिद्धू का विवादों से पुराना नाता रहा है। अपने क्रिकेट कैरियर के दौरान भी वह विवादों में रहे। एक बार तो अपने गर्म मिजाज के कारण उनका क्रिकेट कैरियर समाप्‍त सा हो गया था।  भारतीय क्रिकेट टीम के इंग्लैंड दौरे के समय कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन के साथ हुए विवाद के बाद सिद्धू इंग्लैंड का दौरा बीच में ही छोड़कर चले आए थे। इसके बाद उन्हें कहा गया कि अब उनकी भारतीय क्रिकेट टीम में वापसी मुश्किल है, लेकिन भगवान पर भरोसे के चलते उनकी दोबारा टीम में वापसी हुई।

-1988 में पटियाला में कार पार्किंग को लेकर सिद्धू का विवाद हुआ और हाथापाई भी हुई। इसके बाद 65 साल के गुरनाम सिंह की अस्पताल में मौत हो गई। इसके बाद से 30 सालों तक निचली अदालत से लेकर हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक सिद्धू खुद को बेकसूर साबित करने के लिए लड़ते रहे। आखिरकार सिद्धू को इस केस में सुप्रीम कोर्ट ने बरी करके बड़ी राहत दी।

-पटियाला के निवासी सिद्धू को अमृतसर से भाजपा का टिकट मिला तो उन्‍हें बाहरी उम्मीदवार कहा गया। यह मुद्दा गर्मा गया तो उन्होंने अमृतसर के लोगों के साथ वायदा किया कि वह अमृतसर छोड़कर नहीं जाएंगे। पटियाला नहीं जाएंगे। इस पर खासा विवाद हुआ था और उन पर घेरा कसने की कोशिश हुई, लेकिन उन्‍होंने लोगों से किया वादा सांसद रहते पूरी तरह निभाया। वह कहते हैं आज तक वायदे को निभा रहा हूं और आगे भी निभाउंगा।

-भाजपा के लिए अकाली दल के संबंधों को लेकर सिद्धू का विवाद रहा। पहले बादल परिवार की जमकर तारीफ करने वाले सिद्धू ने बादलों पर हमला बोल दिया। वह प्रकाश सिंह बादल और सुखबीर बादल पर व्‍यक्तिगत हमले करने लगे। गठबंधन में रहने के बावजूद उस समय भाजपा नेता सिद्धू के इस रुख से विवाद पैदा हो गया। सिद्धू इस बात पर अड़े रहे कि पंजाब में भाजपा अकाली दल से गठबंधन तोड़े। इसके बाद भाजपा ने उनको 2014के चुनाव में अमृतसर से टिकट नहीं दिया अौर पंजाब की राजनीति से अलग रखा। भाजपा ने सिद्धू को राज्यसभा सदस्य का सदस्‍य बनाया, लेकिन कुछ दिन बाद ही उन्‍होंने राज्‍यसभा की सदस्‍यता से इस्‍तीफा दे दिया और भाजपा छोड़ दी।

-भाजपा छोड़ने के बाद सिद्धू का आम आदमी पार्टी के संपर्क हुआ। अरविंद केजरीवाल ने बातचीत लगभग फाइनल होने के बाद बात बिगड़ गई। इसके बाद सिद्धू ने केजरीवाल पर हमला बोला और आरोप लगाए कि केजरीवाल बाहर से कुछ और अंदर से कुछ और हैं। वह पंजाब में राजनीति करने नहीं बल्कि पंजाब को लूटने की नीयत से यहां आ रहे हैं। सिद्धू और केजरीवाल के बीच खूब बयानबाजी का दौर चला। उनके बीच यह राजनीतिक विवाद खूब गर्माया। 

-इसके बाद सिद्धू ने अकाली दल का साथ छोड़कर आए परगट सिंह व बैंस ब्रदर्स सिमरजीत सिंह बैंस व बलविंदर सिंह बैंस के साथ एक माेर्चा बनाया। बाद में उन्‍होंने परगट सिंह के साथ राहुल गांधी से मुलाकात की और उनके कांग्रेस ज्वाइन करने की चर्चाअों ने जोर पकड़ा। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सिद्धू का विरोध किया। अंत में राहुल के दबाव में कैप्टन माने और सिद्धू को कांग्रेस में ज्वाइन करवाया गया। चर्चा रही कि कांग्रेस के विधानसभा चुनाव में जीतने पर उन्हें उपमुख्यमंत्री पद दिया जाएगा। लेकिन, चुनाव के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सिद्धू को डिप्टी सीएम बनाने से इन्कार कर दिया।

– सिद्धू ने कैबिनेट मंत्री बनने के बाद शहरी निकाय के साथ हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट विभाग की भी मांग की, लेकिन कैप्टन ने ठुकरा दी। इसके बाद से ही सिद्धू और कैप्‍टन अमरिंदर सिंह में खींचतान शुरू हो गई। 

-मंत्री बनने के बाद सिद्धू ने जालंधर, अमृतसर व लुधियाना नगर निगमों में पिछली सरकार के कार्यकाल में तैनात रहे तीन आइएएस अफसरों को खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में कारवाई की सिफारिश की। इस पर काफी विवाद हुआ। सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उनकी सिफारिश नहीं मानी।

– केबल, माफिया, नशा माफिया, रेत माफिया, ट्रांसपोर्ट माफिया के मुद्दे को लेकर सिद्धू ने हर मौके पर अकाली दल व सुखबीर बादल तथा बिक्रम सिंह मजीठिया को घेरने की कोशिश की, लेकिन कैप्टन अमरिंदर सिंह हर बार सिद्धू  को बैकफुट पर ढकेलते रहे। विवाद आज तक जारी है।

– सिद्धू का अपने सहयोगी मंत्री तृप्‍त राजिंदर सिंह बाजवा से भी विवाद पिछले दिनों खूब सुर्खियों में रहा। दाेनों ने एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी की।

– अब सिद्धू के पाकिस्‍तान जाने पर विवाद पैदा हो गया है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को अपना आदर्श बताने और राजनीति में खुद को लाने का श्रेय देनेवाले सिद्धू उनके निधन के बाद श्रद्धांजलि देने नहीं गए और उनके अंतिम संस्‍कार के दिन पाकिस्‍तान में इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने चले गए।