
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस हर साल 8 मार्च को मनाया जाता है। यह उन महिलाओं की प्रशंसा करने का दिन है जो व्यक्तिगत और पेशेवर लक्ष्यों को पूरा करने के लिए निरन्तर प्रयासरत हैं।और समाज की सम्मानिय महिलाओं को प्रेरित करता रहा है ।
इसी क्रम मे हमने बात की मेहनत , लगन व समर्पण के बल पर अपनी अलग पहचान बनाती लिटिल चैम्प्स प्लेस्कूल की निदेशक व समाज-सेवीका सौम्या सागर अग्रवाल से । इन्होने प्ले स्कूल शिक्षा में अपनी 12 वर्षो की यात्रा में न सिर्फ हजारों बच्चों को शिक्षीत किया बल्कि 100 से अधिक शिक्षीकाओ को प्रशिक्षित भी किया है। सिर्फ महिलाओं द्वारा स्थापित व सन्चालित यह विधालय मुरादाबाद व आसपास क्षेत्र का अकेला सन्स्थान है ।
प्ले स्कूल शिक्षा मे अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाली सौम्या सागर अग्रवाल ने समस्त महिलाओं को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर ह्रदय से सादर नमन प्रस्तुत करते हुए बताया कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2023 की थीम “एक स्थायी कल के लिए लैंगिक समानता की आवश्यकता” है । लैंगिक समानता के बिना आज एक स्थायी भविष्य और एक समान भविष्य हमारी पहुंच से बाहर है।
बच्चों के मष्तिष्क का 80% विकास 6 वर्ष की आयु तक हो जाता है इसलिए यह और भी जरूरी है कि बच्चों मे.आवश्यक मूल्यों का बीजारोपण प्ले स्कूल अवस्था मे ही किया जाए ।
इसी क्रम मे विधालय मे आजादी का अमृत महोत्सव का आयोजन भी किया गया है जिसमें बच्चों ने मैं भी मनू, नमामि गंगे, स्वच्छ भारत, आजादी के सिपाही, स्वतंत्रता आंदोलन, भारत की बेटियां जैसे थीम पर अपना प्रदर्शन दिया। विधालय के इस प्रयास की सराहना देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जी ने भी अपने पत्र के माध्यम से किया है । उन्होंने बताया कि हमारा उद्देश्य बच्चों के बाल मन में स्वस्थ ऊर्जा का सन्चार करना है और हमारी यह कोशिश लगातार जारी रहेगी । उन्होंने कहा कि मैं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत की सोच पर पूरा यकीन रखती हूंँ और मेरा मानना है की आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में शिक्षा और इन्नोवेशन की सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका है । शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे निरंतर प्रगति , वैश्विक शिक्षा के नए मापदंडों और भारत सरकार की नई शिक्षा नीति के आधार पर प्लेस्कूल शिक्षा हेतु एक स्वस्थ वातावरण तैयार करने के लिए मैं लिटिल चैम्प्स प्लेस्कूल के अंदर और बाहर निरन्तर प्रयासरत हुँ ।
उन्होंने कहा प्ले स्कूल सिर्फ एक इमारत नहीं है , यह एक मजबूत आधार है जिस पर समस्त जीवन का मजबूत भवन टिका होता हैं । इसलिए यह आवश्यक है कि शिक्षा व्यवस्था मे नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कारों को प्लेस्कूल समय से ही समाहित किया जाए । बच्चों के बचपन को शिक्षा-स्वास्थ्य-संस्कारों से सिंचना एक चुनौतीपूर्ण दायित्व है और अपने बच्चों को खिलते देखने की खुशी का भाव अभिभावकों के मुख पर देखना ही हमारी कामयाबी है। सौम्या सागर अग्रवाल ने व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन मे जो सन्तुलन स्थापित किया है वह प्रेरणादायक व अनुकरणीय है ।