एयरसेल मैक्सिस डील मामले में पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम के खिलाफ दर्ज चार्जशीट पर मंगलवार को पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई. सीबीआई ने कोर्ट से इस मामले की सुनवाई के लिए दो सप्ताह का समय मांगा है. सीबीआई ने तर्क दिया है कि अभी तक पब्लिक सर्वेंट पर विभाग से उन्हें अनुमति नहीं मिल सकी है, जिसके कारण इस मामले की सुनवाई के लिए थोड़ा वक्त लगेगा. कोर्ट ने इस मामले में एक अक्टूबर की तारीख निर्धारित कर दी है.
सीबीआई ने एयरसेल मैक्सिस डील मामले में पूर्व वित्रमंत्री पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. इस मामले में सीबीआई की ओर से चिदंबरम समेत 17 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है. इनमें से 11 व्यक्ति हैं और सात कंपनियां हैं. बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय ने इससे पहले दाखिल चार्जशीट में कहा है कि एयरसेल ने 2006 में 3,500 करोड़ रुपये के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को लाने के लिए इजाजत मांगी थी लेकिन वित्त मंत्रालय ने इन आंकड़ों को कम करके दिखाया. सीबीआई की चार्जशीट दायर करने के बाद पी चिदंबरम ने कहा, ‘सीबीआई पर मेरे खिलाफ निरर्थक आरोपों के आधार पर चार्जशीट दाखिल करने का दबाव बनाया गया. केस अब कोर्ट में है और हम पूरी ताकत से लड़ेंगे. इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं कहूंगा.’
ईडी के मुताबिक वित्त मंत्रालय ने मामले को आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति के पास जाने से बचाने के लिए दिखाया कि एयरसेल ने सिर्फ 180 करोड़ रुपये की FDI के लिए इजाजत मांगी है. उस समय लागू नियमों के मुताबिक 600 करोड़ रुपये तक के विदेशी निवेश को वित्त मंत्री FIPB के जरिए मंजूरी दे सकते थे. ईडी का कहना है कि पी चिदंबरम को 600 करोड़ रुपए तक के प्रोजेक्ट प्रपोजल्स को मंजूरी देने का अधिकार था. इससे ऊपर के प्रोजेक्ट के लिए कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स की मंजूरी की जरूरत थी. यह मामला 3,500 करोड़ रुपये की एफडीआई की मंजूरी का था, इसके बावजूद एयरसेल-मैक्सिस एफडीआई मामले में चिदंबरम ने कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स की मंजूरी के बिना मंजूरी दी.