
छत्तीसगढ़ में पिछले सप्ताह 1761 व्यक्ति कोरोना पाजिटिव पाए गए, जिसमें 29 व्यक्तियों की मृत्यु हुई। मृतकों में इस सप्ताह 71 से 80 आयु वर्ग के 31 प्रतिशत व्यक्ति शामिल हैं। 51 से 60 वर्ष की आयु के 28 प्रतिशत व्यक्ति थे। इनमें से पांच व्यक्तियों की मृत्यु अस्पताल में भर्ती होने के 24 घंटे के अंदर हो गई, जबकि छह लोगों की मृत्यु 48 घंटे के अंदर हो गई।

मृतकों में 20 पुरुष और नौ महिलाएं थीं। राज्य स्तरीय डेथ आडिट समिति में मंगलवार को सभी आंकड़ों की समीक्षा की गई और यह पाया गया कि लोग अभी भी कोरोना की जांच से बच रहे हैं। बैठक में सभी जिलों से कुछ केस की समीक्षा की गई।
रायगढ़ जिले की 44 वर्ष की महिला को 12 फरवरी से बुखार, गले में खराश की शिकायत थी। लेकिन 18 फरवरी को कोरोना का टेस्ट कराया। फिर 21 फरवरी को अस्पताल में भर्ती हुई और हर संभव प्रयास के बाद भी 24 फरवरी को मृत्यु हो गई। इसीलिए चिकित्सक बुखार, खांसी के लक्षण दिखने पर 24 घंटे के अंदर जांच कराने पर जोर देते हैं, ताकि समय रहते इलाज हो सके।
धूम्रपान से कोशिकाएं होतीं हैं कमजोर
धूम्रपान की लत छोड़ने के लिए निकोटीन पैच का प्रचलन आम हो चला है। चिकित्सकों एवं मरीजों का यह मानना है कि पैच के उपयोग से चूंकि धुआं नहीं निकलता है। अतः फेफड़ों तथा श्वसन की बीमारी दूर हो जाती है। तंबाकू में निकोटीन ही वह रसायन है, जो कि अस्थि बनाने वाली कोशिकाओं को कमजोर करता है। रक्त वाहिकाओं को संकुचित करता है। अतः जो मरीज इलाज के दौरान धूम्रपान छोड़कर निकोटीन पैच लगाते हैं, उनकी हड्डियां देर से जुड़ती है।
धूम्रपान ही नहीं अपितु निकोटीन के हड्डियों पर प्रत्यक्ष दुष्प्रभाव को देखते हुए धूम्रपान के रोकथाम में प्रायः उपयोग होने वाली निकोटीन पैच का उपयोग ही सीमित है। निकोटिन का दुष्प्रभाव सिर्फ हड्डियों को ही नहीं कमजोर करता है, बल्कि लगाए गए बोनग्राफ्ट, वैस्कुलर पेडिकल, तथा प्लास्टिक सर्जरी के फ्लैप को भी नष्ट कर देता है।
अतः अन्य उपायों जैसे मनोचिकित्सकीय परामर्श, काउंसलिंग, व्यावहारीक परिवर्तन जैसे उपायों से रोगी की मदद की जा सकती है। धूम्रपान का रोकथाम संभव है एवं इसके लाभों के बारे में रोगी को अवगत कराकर धूम्रपान रोकथाम की प्रक्रिया को सुगम बनाया जा सकता है। यह पाया गया है कि धूम्रपान बंद करने के बाद पचास प्रतिशत व्यक्ति पुनः धूम्रपान चालू करते है। अब वो स्वस्थ हैं, पर निकोटीन का अस्थियों पर प्रभाव एक साइलेंट कीलर है जिससे बचना एक दृढ़ इच्छाशक्ति से ही संभव है।