झारखंड: 108 नंबर की एंबुलेंस की नहीं मिल रही सेवाएं, निजी एंबुलेंस से जाने को मरीज मजबूर

तत्काल चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर झारखंड सरकार द्वारा चलाए जा रहे 108 एंबुलेंस का लाभ धनबाद वासियों को सही समय पर नहीं मिल रहा है। लिहाजा गरीब मरीजों को निजी एंबुलेंस से रांची और दूसरे अस्पताल जाने पड़ रहे हैं।

जिले के सबसे बड़े अस्पताल एसएनएमएमसीएच में भर्ती मरीजों को रांची या बोकारो लेकर रेफर पर तत्काल एंबुलेंस नहीं मिल रहे हैं। मरीज के स्वजन 108 नंबर पर फोन कर रहे हैं, फोन रिसीव करने के बाद कॉल सेंटर के प्रतिनिधि का कहना है कि एंबुलेंस व्यस्त हैं, कोई भी एंबुलेंस खाली नहीं है। एंबुलेंस कब मिलेगा यह भी नहीं बता रहे हैं। जब भी कोई जरूरतमंद 108 नंबर पर फोन कर रहा है उसे तत्काल एंबुलेंस नहीं मिल पा रहा है ऐसे में गंभीर मरीजों को मजबूरी में निजी एंबुलेंस किराए पर लेना पड़ रहा है। 

भूली के मरीज को दिनभर करना पड़ा इंतजार

भूली के आम बागान के रहने वाले एक 12 वर्षीय बच्चे को लेकर स्थानीय लोग अस्पताल पहुंचे। बच्चा को लीवर की समस्या से ग्रसित है। पार्षद अशोक यादव सहित अन्य लोग कई बार 108 नंबर पर फोन करते रहे लेकिन समय पर एंबुलेंस नहीं मिला। दिनभर बीतने के बाद शाम में रेड क्रॉस के एंबुलेंस बच्चे को रिम्स रांची भेजा गया। इसके बाद लोगों ने इसकी शिकायत सिविल सर्जन डॉ गोपाल दास और अधीक्षक एके चौधरी से की है।

 गोविंदपुर के नईम को भी नहीं मिला एंबुलेंस

गोविंदपुर के नईम को भी 108 एंबुलेंस का लाभ नहीं मिला। सड़क दुर्घटना में घायल नईम के घरवाले 108 एंबुलेंस के लिए कॉल करते रहे, लेकिन बताया गया कि इस रूट पर एंबुलेंस नहीं है। इसके बाद निजी एंबुलेंस से घर के सदस्य उसे बोकारो बीजीएच ले गए। 

 किराए को लेकर मनमानी कर रहे हैं निजी एंबुलेंस

सरकारी 108 एंबुलेंस की उदासीन रवैया के कारण निजी एंबुलेंस ने मनमानी शुरू कर दी है। एंबुलेंस चालक बोकारो, दुर्गापुर, रांची रिम्स के लिए मनमाना भाड़ा ले रहे हैं। रिम्स के लिए 15 से 20 हजार तक भाड़ा एंबुलेंस चालक मांग रहे हैं। ऐसे में गरीब मरीजों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

वर्जन

108 एंबुलेंस को लेकर शिकायतें आ रही हैं, हालांकि यह मामला सीधे कंट्रोल रूम रांची का है। इसके बारे में स्थानीय स्तर पर हम लोग ज्यादा कुछ नहीं कर सकते हैं। हालांकि वरीय अधिकारियों को इसकी शिकायत की जाएगी।