झारखंड: जनवरी माह में वाणिज्यकर विभाग का राजस्व संग्रह दो हजार करोड़ के पार

झारखंड कोरोना की मंदी के दौर से अब तकरीबन उबर चुका है। राजस्व के मोर्चे पर संभलते हालात कुछ ऐसा ही बयां कर रहे हैं। जनवरी माह में वाणिज्यकर विभाग का राजस्व संग्रह रिकार्ड स्तर पर पहुंचता दिखाई दिया। जीएसटी और वैट का संग्रह तथा जीएसटी कंपनसेशन के एवज में लोन के मद में मिली राशि ने जनवरी माह के राजस्व संग्रह को दो हजार करोड़ के पार करा दिया है। यह अब तक का सर्वाधिक संग्रह है।

राजस्व के मोर्चे पर पिछले कुछ माह में हालात तेजी से संभले हैं, उसी का परिणाम है कि पिछले दस माह का राजस्व संग्रह, गत वित्तीय वर्ष के समतुल्य पहुंच गया है। वह भी उस स्थिति में जब कोरोना के कारण पहले तीन माह सरकार के खजाने की हालत खस्ता रही। वित्तीय वर्ष 2019-20 में जनवरी तक का कलेक्शन 11843.88 करोड़ रहा, जबकि वर्ष 2020-21 में इसी अवधि का संग्रह 11,698.10 करोड़ रहा। जाहिर है यह मामूली अंतर अगले दो माह में न सिर्फ पट जाएगा बल्कि उससे कहीं अधिक पर पहुंच जाएगा।

जीएसटी पांच सौ करोड़ पार, वैट पहुंचा पांच सौ के करीब

जनवरी माह का जीएसटी कलेक्शन 522.58 करोड़ रहा, जो कि पिछले साल की समान अवधि 472.23 करोड़ से कहीं अधिक है। वैट भी जनवरी में पिछले साल के सापेक्ष बढ़कर 485.95 करोड़ रहा। वहीं आइजीएसटी से 256.89 करोड़ आए। हालांकि राजस्व के आंकड़ों का उछाल जीएसटी कंपनसेशन के मद में लोन से मिलने वाली राशि के कारण आया। जनवरी में लोन मद में 735.60 करोड़ की राशि खजाने में आई।

वाणिज्यकर विभाग का राजस्व संग्रह बढ़कर 1531 करोड़ पहुंचा

कोविड-19 की शुरुआती चुनौतियों से निपटने के बाद राजस्व के मोर्चे पर हालात अब तेजी से सामान्य हो चले हैं। इस वित्तीय वर्ष की तीसरी तिमाही में वाणिज्यकर विभाग का राजस्व संग्रह बढ़कर 1531 करोड़ पहुंच गया, जो कि अब तक का सर्वाधिक है। जीएसटी और आइजीएसटी संग्रह तो बढ़ा ही वैट ने भी सरकार के खजाने में भरने में अपनी अहम भूमिका अदा की। इसके अलावा 318.89 करोड़ केंद्र से क्षतिपूर्ति मद में भी मिला।

दिसंबर में जीएसटी कलेक्शन 493 करोड़ पहुंच गया जो कि गत वर्ष की समान अवधि से 470.34 करोड़ का 104 प्रतिशत रहा। वहीं, वैट समेत नॉन जीएसटी कलेक्शन 434.97 करोड़ रहा। आइजीएसटी भी बढ़कर 284.2 करोड़ पहुंच गया। दिसंबर में राजस्व संग्रह बढ़ने से इस वित्तीय वर्ष वाणिज्यकर विभाग का राजस्व संग्रह 9688.08 करोड़ पहुंच गया है जो कि गत वित्तीय वर्ष की समान अवधि 10726 करोड़ से कुछ ही कम है। मार्च तक यह हालात और सुधरने की उम्मीद जताई जा रही है।