सूरजपुर जिले के बिहारपुर में वृद्घ की रक्तरंजित लाश मिलने के मामले का हुआ रहस्योद्घाटन

सूरजपुर जिले के बिहारपुर में वृद्घ की रक्तरंजित लाश मिलने के मामले का रहस्योद्घाटन हो गया है। पारिवारिक विवाद के कारण पोते ने ही दादा की हत्या कर दी थी। वारदात के बाद वह आराम से घर में ही सो गया था। बिहारपुर के चौकापारा निवासी छोटेनान पंडो 70 वर्ष की लाश 22 जून की सुबह घर में ही मिली थी। घटना के वक्त उसी कमरे में मृतक का आठ साल का परपोता तथा घर के दूसरे कमरे में पत्नी और पोता शिवप्रताप पंडो सो रहा था।

प्रथम दृष्टया परिवार के ही किसी सदस्य द्वारा वारदात को अंजाम दिए जाने का संदेह जताया जा रहा था, क्योंकि घर में और कोई नहीं था। एसपी राजेश कुकरेजा के निर्देश पर एसडीओपी मंजूलता बाज तथा चांदनी थाना प्रभारी शिवकुमार खुंटे के नेतृत्व में पुलिस ने जब जांच, पड़ताल शुरू की तो पता चला कि मृतक के पोते शिवप्रताप पंडों से पिछले एक वर्ष से घरेलू कारणों से विवाद चला आ रहा था।

आरोपित शिवप्रताप अपने दादा पर यह आरोप लगाता था कि वह अपने छोटे पोते विजय प्रताप पंडो की ही मदद करता है। वृद्घा पेंशन की राशि हो या घर बनाने के लिए आर्थिक मदद, वह छोटे पोते विजय प्रताप का तो साथ देता है, लेकिन आरोपित शिवप्रताप द्वारा मांग करने के बावजूद न तो रकम देता है और न ही किसी अन्य प्रकार से सहयोग की उसकी मंशा रहती है। इसी से वह दादा से रंजिश रखने लगा था।

घटना दिवस 21 जून की सुबह से आरोपित शिवप्रताप पंडो घर से निकला था। रात को वह शराब सेवन कर घर वापस लौटा। भोजन भी नहीं किया और कमरे में सोने चला गया। उसके माता-पिता, छोटे बेटे के घर सोने चले गए। इधर दादा-दादी के साथ पोता शिवप्रताप पंडो और परपोता रह गए थे।

मध्यरात्रि के बाद आरोपित शिवप्रताप ने बसुला से दादा के गर्दन पर वार कर हत्या कर दी थी। बसुला को कमरे में ही छोड़कर वह अपने बिस्तर में सोने चला गया था। सुबह मृतक की पत्नी ने सबसे पहले पति का शव देखा था। उस दौरान भी आरोपित पोता कमरे में सो रहा था। उसने पुलिस को गुमराह करने की भी कोशिश की, लेकिन विरोधाभाषी बयान के कारण वह पकड़ा गया।