छत्तीसगढ़ के जंगलों में बड़ा रोचक है हाथियों का नामकरण, 1990 से चल रही है परंपरा

छत्तीसगढ़ के जंगलों में विचरण करने वाले हाथियों के लिए नाम ही पहचान है। गांव, नदी, त्योहार और व्यवहार से उनका नामकरण किया जाता है। इसी आधार पर ग्रामीण तथा वन विभाग के अधिकारी 1990 से इनके नाम तय कर रहे हैं। वर्तमान में 80 हाथी अलग-अलग दलों में या अकेले विचरण कर रहे हैं। प्रदेश के सरगुजा वनक्षेत्र में झारखंड के कुसमी जंगल के हाथियों की आवाजाही 1990 में शुरू हुई थी। बीच के वर्षों में नामकरण की प्रक्रिया बंद हो गई थी, परंतु पिछले चार वर्षों से नामकरण फिर शुरू हो गया है। 1990 में जनहानि करने वाले एक हाथी को सिविलदाग गांव में पकड़ा गया था। उसी आधार पर हाथी का नामकरण सिविल बहादुर किया गया।

उक्त हाथी आज भी रेस्क्यू सेंटर में है। इसी तरह बहरादेव, महान, प्यारे हाथी हैं, जो अकेले विचरण करते हैं। क्षेत्र के लोग व्यवहार के आधार पर उनकी पहचान कर लेते हैं। इनके अलावा हाथियों के बांकी दल, सहज दल, करमा दल, ओडिशा दल, गौतमी दल, अशोक दल, गुर घासीदास दल आदि भी वनों में विचरण कर रहे हैं।

रोचक है नामकरण

– सिविल बहादुर- कुसमी के सिविलदाग बस्ती में पकड़ा गया।

– लाली- अंबिकापुर से लगे लालमाटी के जंगल में कब्जे में आया।

– बहरादेव- तोड़फोड़ के दौरान प्रतिक्रिया नहीं दिखाने के कारण सुनाई न देने के ग्रामीणों के दावे पर नामकरण।

– महान- विचरण क्षेत्र सूरजपुर जिले के महान नदी के आसपास मिला।

– प्यारे- सेटेलाइट रेडियो कालरिंग के दौरान मिला सहयोग, कद-काठी भी बेहतर।

– मोहन- सूरजपुर वन परिक्षेत्र के मोहनपुर जंगल में कई महीनों तक डेरा।

– खोपादेव- सरगुजा अंचल की आराध्य खोपा देवस्थल के नजदीक जंगल में विचरण, वर्तमान में मध्यप्रदेश के सीधी जिले में मौजूदगी।

दल का नामकरण भी अनूठा

अशोक दल- अंबिकापुर में प्रवेश करने के बावजूद शांत तरीके से वापस लौटने के कारण सम्राट अशोक के वैराग्य को याद कर नामकरण।

बांकी दल- सूरजपुर जिले के प्रतापपुर, सूरजपुर व बलरामपुर जिले के राजपुर वन परिक्षेत्र तक बांकी नदी के आसपास विचरण करता है इसलिए बांकी दल।

करमा दल- करमा त्योहार के दिन दल में नए सदस्य का जन्म।

गुरु घासीदास दल- गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में ही विचरण।

गौतमी दल- अशोक दल के एक सदस्य की कुएं में गिरने से मौत के बाद दल के दूसरे सदस्यों के झारखंड में प्रवेश कर जाने के बाद ओडिशा से घुसे दल की हथिनी को सेटेलाइट कॉलर आइडी लगाने के बाद सम्राट अशोक की धर्मपत्नी गौतमी के नाम से नामकरण।

मैंने सरगुजा वनक्षेत्र में पदस्थापना के दौरान हाथियों के व्यवहार, विचरण क्षेत्र पर अध्ययन किया था। उसी अध्ययन के आधार पर क्षेत्रीय जनों की आस्था, नदी, गांव, त्योहार, जंगल, विचरण क्षेत्र के आधार पर नामकरण किया गया। इससे गांव वालों को यह पता चल जाता है हाथी किस दल के के हैं और कौन-कौन अकेले घूमते हैं।