
छत्तीसगढ़ में करंट से हाथियों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। 2001 से अब तक यहां 157 हाथियों की मौत हुई है। इनमें से 30 फीसद हाथियों की मौत बिजली का करंट लगने से हुई है। दरअसल वन क्षेत्रों में बिजली के तार मापदंड के अनरूप ऊंचाई पर नहीं हैं। बिजली विभाग ने तारों को कवर्ड भी नहीं किया है। नतीजतन हाथियों और अन्य वन्य प्राणियों की करंट से मौत हो रही है। वन्यजीव प्रेमी नितिन सिंघवी ने हाथियों की मौत के लिए विद्युत कंपनी और वन विभाग के अधिकारियों को दोषी ठहराया है।
सिंघवी ने बताया कि छत्तीसगढ़ में करंट से हाथियों की लगातार हो रही मौतों के मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में जनहित याचिका लगाई गई थी। याचिका लंबित रहने के दौरान विद्युत वितरण कंपनी ने कहा था कि वन क्षेत्रों में नीचे जा रही विद्युत लाइनों, लटकते हुए तारों, बेयर कंडक्टर (नंगे तारों) को कवर्ड कंडक्टर में बदलने के लिए वन विभाग 1674 करोड़ रुपये दे तो कंपनी एक साल के भीतर सुधार कार्य कर देगी।
कार्रवाई की मांग
सिंघवी ने कहा कि धरमजयगढ़ में विद्युत करंट से हाथियों की मौत के मामले में उच्च न्यायालय द्वारा चिंता जताने के बावजूद फिर करंट से हाथी की मौत हो गई। इसके लिए विद्युत वितरण कंपनी के इंजीनियर तथा वन विभाग के लापरवाह अधिकारी जिम्मेदार हैं। उन्होंने इनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।