
पूर्वी-मध्य बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बना है। इसका असर व्यापक तौर पर देखा जा रहा है। छत्तीसगढ में भी इसके प्रभाव से उमर और नमी बढने के साथ बादल बन रहे हैं और बारिश की स्थित निर्मित हो रही है। बुधवार को राजधानी रायपुर सहित राज्य के कई हिस्सों में शाम के वक्त मौसम बदला और बारिश हुई। आज भी मौसम का मिजाज इसी तरह का बना रहेगा।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आज दिन भर आसमान में हल्के बादल छाए रहेंगे और शाम के वक्त रायपुर सहित प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश हो सकती है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार यह स्थिति अगले दो दिनों तक बनी रहेगी।
इस बीच तेज हवाओं के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश की भी आशंका जताई गई है। मौसम में आए बदलाव से जहां लोगों को सूरज की तेज तपिश से थोडी राहत मिली है तो वहीं दूसरी ओर वातावरण में नमी बढने से लोग थोडी बेचैनी भी महसूस कर रहे हैं।
मौसम विज्ञानियों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी के ऊपर कम दबाव का एक क्षेत्र बना हुआ है। इसके ऊपर एक चक्रवात भी है। इसका असर ओडिशा, उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश, और तेलंगाना में व्यापक रूप में दिख सकता है। 11 जून को इन इलाकों में भारी बारिश की संभावना है।
बता दें कि इसी समय दक्षिण-पश्चिमी मानसून बस्तर की ओर से प्रदेश में दस्तक देता है। इससे पहले एक जून को छत्तीसगढ़ में प्री-मानसून ने दस्तक दी। इस दौरान जिले में अच्छी बारिश भी हुई। मौसम विभाग के अनुसार अगर, सिस्टम को इसी प्रकार का अनुकूल परिस्थितियां मिली तो पूर्वानुमान है कि मानसून 10 जून तक बस्तर और 15 जून तक रायपुर में पहुंच जाएगा। ऐसे में किसानों को राहत मिलेगी।
कृषि वैज्ञानिकों की किसानों को सामयिक सलाह
कृषि संचालनालय एवं इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने राज्य के किसानों को मौसम आधारित सलाह दी है कि मानसून के आगमन को मद्देनजर रखते हुए किसान खरीफ सीजन के लिए धान एवं अन्य फसलों के लिए तैयारियां कर ले।
कीट व्याधियों की प्रतिरोधी एवं सहनशील किस्में छत्तीसगढ़ राज्य एवं विकास निगम एवं इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर में उपलब्ध है। इन पर पौध रोगों एवं कीटों का असर कम होता है, इसलिये किसान अपने प्रक्षेत्रों में लगाने वाली किस्मों का चुनाव करें एवं बीजों को फफूंद नाशी का उपचार करने के बाद ही बोवाई हेतु उपयोग करें। किसान मृदा स्वास्थ्य के आधार पर ही खाद उर्वरक का उपयोग करें।
उद्यानिकी फसल के लिए सलाह
जिले में उघानिकी फसल का रकबा भी करीब 10 हजार हेक्टेयर है। ऐसे में सब्जियों एवं फलों की फसलों के लिए किसानों को सलाह दी गई है कि थरहा (नर्सरी) को ऊंचे स्थान पर 15 से.मी. ऊंची हुई क्यारियों में लगाये तथा वायरस रोग से बचाने हेतु सफेद एग्रोनेट (मच्छरदानी) के अंदर लगावें।
थरहा के पौधों को गलन से बचाने हेतु बीज को उपचारित कर बुवाई करें। आम, नीबू वर्गीय एवं अन्य फसलों में सिचाई प्रबंधन करें। नये फल उद्यान के लिए तैयारी करें। फलदार वृक्षों हेतु निर्धारित दूरी पर गड्डे खोदकर छोड़ दें। इसी तरह से पशुपालक किसानों को सलाह दी गई है कि पशुओं को 50-60 ग्राम नमक पानी में मिलाकर अवश्य खिलाये। दुधारू पशुओं के आहार में दाना मिश्रण की मात्रा जरूर बढ़ाएं
शहर अधिकतम न्यूनतम
रायपुर 39.4 26.0
अम्बिकापुर 36.0 25.4
बिलासपुर 39.6 28.8
पेंड्रारोड 36.8 23.8
जगदलपुर 35.1 21.5
शहर प्रतिदिन वर्षा ऋतू वर्षा
रायपुर 1.0 46
अम्बिकापुर 0 15
बिलासपुर 0 18
पेंड्रारोड 0 46
जगदलपुर 42.0 49