महाराष्ट्र सरकार ने नए बिल्डिंग में में सीसीटीवी कैमरे लगाना कर दिया अनिवार्य…

महाराष्ट्र सरकार ने नए बिल्डिंग में में सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य कर दिया है। राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने बुधवार को विधान परिषद में इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी कैमरे राज्य के गृह विभाग के अपराध और आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क और सिस्टम (सीसीटीएनएस) से जुड़े होंगे। बता दें कि मुख्य विपक्षी दल भाजपा राज्य में बार-बार महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों के मुद्दे को उठा रही है। इसी दौरान महाराष्ट्र सरकार ने यह फैसला लिया है।

देशमुख ने इसकी जानकारी देते हुए कहा,’हम वर्तमान नियमों में संशोधन करेंगे और राज्य में बनने वाले हर नए भवन में सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य करेंगे। हम इन सीसीटीवी कैमरों के फीड को अपने मौजूदा सीसीटीएनएस नेटवर्क से भी जोड़ेंगे।’

मौजूदा नेटवर्क में 5000 और सीसीटीवी कैमरे जोड़े जाएंगेदेशमुख ने आगे कहा कि मुंबई में मौजूदा नेटवर्क में 5000 और सीसीटीवी कैमरे जोड़े जाएंगे। ‘मनोधैर्य योजना’ में पेट्रोल या डीजल समेत अन्य समानों को शामिल करने के लिए संशोधित किया जाएगा, जो कई अपराधों में महिलाओं पर हमला करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। राज्य द्वारा संचालित योजना वर्तमान में दुष्कर्म,एसिड-अटैक सर्वाइवर्स और यौन अपराधों के शिकार बच्चों को रखा गया है।

पूरे महाराष्ट्र में  पूरे महाराष्ट्र में खोलने की योजना

जब सदस्यों ने महिला पीड़ितों की काउंसलिंग से संबंधित मुद्दों को उठाया, तो देशमुख ने कहा, ‘ यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं के लिए पुणे पुलिस एक ‘भरोसा’ सेल चलाती है। हम पूरे महाराष्ट्र में ऐसी सेल खोलने की कोशिश करेंगे।’

ऑनलाइन एफआइआर के लिए सीसीटीएनएस प्रणालीदेशमुख ने बाद में विधानसभा को बताया कि सरकार ने अपराध जांच प्रणाली को और बेहतर बनाने करने की दिशा में कदम उठाने की बात कही। उन्होंने कहा कि राज्य भर में प्रत्येक पुलिस स्टेशन में ऑनलाइन एफआइआर के लिए सीसीटीएनएस प्रणाली स्थापित करने और छह सीसीटीवी कैमरों की प्रस्तावित स्थापना जैसे कदम उठाए हैं। महिलाओं के खिलाफ अपराध की बढ़ती घटनाओं पर नोटिस का जवाब देते हुए, देशमुख ने डिश एक्ट की तर्ज पर एक बिल लाने का आश्वासन दिया।