
गांधीनगर थाना क्षेत्र के ग्राम सकालो स्थित पी-2573 झरनाडांड जंगल में सोमवार 30 दिसंबर को मिले ग्रामीण के शव का मंगलवार को मेडिकल कॉलेज अस्पताल में वन अमले की मौजूदगी में पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम किए चिकित्सक ने प्रथम दृष्ट्या शव को चार-पांच दिन पुराना होना और हाथी के कुचलने से मौत होना बताया है। ग्रामीण का जहां शव मिला था उसके पास ही बड़े पंजे का निशान पुलिस ने पाया था, जिससे हाथी द्वारा ग्रामीण को मारने की संभावना को बल मिल जा रहा था, वही वन अमले ने मौत की परिस्थिति को देखते हुए पोस्टमार्टम के बाद ही मौत का कारण स्पष्ट होने की बात कही थी। पोस्टमार्टम के बाद चिकित्सक के प्रथम ओपिनियन में यह स्पष्ट हो गया है कि हाथी के हमले में ही ग्रामीण की मौत हुई है।
चौकीदार बुड़गी राम ने बताया कि मृतक पवन मानिकपुरी पिता अमर साय मानिकपुरी 32 वर्ष मूलत: प्रतापपुर थाना क्षेत्र के नरोला गोविंदपुर का रहने वाला था, जो ससुराल घर चिखलाडीह में उसके यहां घरजमाई की तरह रहता था। बीते 25 दिसंबर को वह जंगल में लकड़ी लेने के लिए गया था, इसके बाद घर वापस नहीं लौटा। काफी खोजबीन अगले दिन तक परिजनों ने की लेकिन कहीं भी उसका पता नहीं चला।
रिश्तेदारों व परिचितों के यहां तलाश के बाद भी जब इसकी जानकारी नहीं मिली तो 27 दिसंबर को गायब हुए युवक के बारे में गांधीनगर थाना पुलिस को जानकारी दी गई थी, जिस पर पुलिस ने गुम इंसान का मामला कायम कर विवेचना में लिया था।
इसी बीच 30 दिसंबर को दोपहर एक बजे के लगभग जंगल में बीट भ्रमण पर निकले चिखलाडीह के चौकीदार ने पगडंडी के पास एक युवक के शव को क्षतविक्षत हाल में देखा और इसकी सूचना वन अमले के साथ ही गांधीनगर थाना पुलिस को दी थी।
मृत व्यक्ति के सीने व गुप्तांग का हिस्सा कुचला हुआ था। पास ही जमीन पर बड़े पंजे का निशान था, जिससे हाथी के हमले में मौत की संभावना जताई जा रही थी। मृतक के शव की शिनाख्त कोटवार बुड;गी राम के दमाद के रूप में होने के बाद पुलिस ने मौके पर शव का पंचनामा किया और देर शाम होने के कारण पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल के शव परीक्षण कक्ष में रखवाया था।
मंगलवार को डिप्टी रेंजर अजय वर्मा सहित अन्य की मौजूदगी में मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक डॉक्टर जेएस सरूता ने मृतक के शव का परीक्षण कर पोस्टमार्टम किया, उनके द्वारा हाथी के हमले में ग्रामीण के मौत की पुष्टि की जा रही है। शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है।
बुधवार 25 दिसंबर की सुबह रेवतपुर जंगल से निकलने के बाद बहरादेव हाथी तड;के कल्याणपुर व सकालो के बीच जंगल में पहुंचा था। इसकी निगरानी वन कर्मियों के द्वारा की जा रही थी, लेकिन किसी को भी हाथी के द्वारा ग्रामीण को मार डालने की भनक नहीं लग पाई।
वन अमले के द्वारा तत्समय कुछ किसानों के खेत में लगी गन्न्े की फसल को नुकसान पहुंचाने के बाद हाथी के सकालो जंगल सीमा से बाहर निकल जाने की जानकारी दी गई थी। 30 दिसंबर को अचानक गांव के चौकीदार ने बड़े पंजे के निशान के पास ही घरजमाई की तरह रह रहे पवन मानिकपुरी के शव को देखा, तो सनसनी फैल गई। सूचना मिलने पर मृतक के पिता सहित अन्य परिजन भी पहुंचे।
वहीं दूसरी ओर कोरबा जिले के पंचायत पाली के आश्रित ग्राम दरजीपारा और जल्के पंचायत के आश्रित ग्राम पनगंवा में अलग अलग हाथियों के दो झुंड ने सोमवार की रात को जम कर उत्पात मचाया। हाथियों ने 8 ग्रामीणों के मकान ध्वस्त कर दिए हैं।
ग्रामीण राम सिंह का कहना है कि हाथियों द्वारा रोजाना किसी न किसी ग्राम में ग्रामीणों के मकान को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। वन विभाग के कर्मचारी हाथियों को नहीं खदेड रहे हैं। कड़ाके की ठंडी मे कई परिवार बेघर हो रहे हैं।
लगभग एक माह से ज्यादा हो गया, दर्जनभर गांव के लोग हाथियों के उत्पात से त्रस्त हैं, वन विभाग से सहयोग नहीं मिलने के कारण ग्रामीण अपने आप को असहाय महसूस कर रहे हैं। प्रभावित लोग दूसरे के मकानों में शरण लेने को मजबूर हैं।